कानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर कानपुर में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और बेहतर देखभाल के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जिले में 75 गौशालाओं के माध्यम से अब तक 15,012 बेसहारा गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। शासन की गाइडलाइन के अनुसार सभी संरक्षण केंद्रों में व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गोवंश संरक्षण के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था की गई है। ग्रामीण इलाकों में संचालित 70 अस्थायी गौशालाओं में 6,654 गोवंश की देखभाल की जा रही है। वहीं, पांच वृहद गो संरक्षण केंद्रों में 2,082 गोवंश को सुरक्षित रखा गया है। इस तरह इन केंद्रों में कुल 8,736 गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है।
शहरी क्षेत्रों में भी आवारा गोवंश की समस्या के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। नगर निकायों के अंतर्गत छह गौशालाएं संचालित हैं। इनमें नगर पंचायत क्षेत्रों में 260, नगर पालिका परिषद क्षेत्रों में 141 और कानपुर नगर निगम की दो बड़ी गौशालाओं में 5,875 निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया गया है।
मानसून के दौरान गोवंश के स्वास्थ्य और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी गौशालाओं में जलभराव और संक्रामक बीमारियों से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा, हरा चारा, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। पशु चिकित्सकों की टीमें नियमित रूप से गौशालाओं का निरीक्षण कर रही हैं और सफाई व्यवस्था की भी निगरानी कर रही हैं।
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप जिले में निराश्रित गोवंश के संरक्षण का कार्य लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि सभी गौशालाओं में गोवंश की समुचित देखभाल की जा रही है और मानसून को देखते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
