नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों से भारतीय प्रशासनिक सेवा को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संविधान, राष्ट्र और नागरिकों के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता के रूप में देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शासन की वास्तविक सफलता कानूनों और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
लोक सेवक परिवर्तन के वाहक हैं
संसद भवन में आयोजित सहायक सचिव कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि लोक सेवक समाज में परिवर्तन के वाहक होते हैं। उनकी भूमिका नागरिकों की आकांक्षाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने की होती है। उन्होंने कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि देश की जनता की अपेक्षाओं और चिंताओं की सर्वोच्च अभिव्यक्ति भी है।
संवेदनशीलता और जनसंपर्क पर दिया जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों को जनता से लगातार जुड़े रहने और भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विविधता को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक प्रभावी प्रशासक के लिए नियमों और कानूनों की जानकारी के साथ-साथ संवेदनशीलता, सहानुभूति और स्थानीय परिस्थितियों की समझ भी आवश्यक है। स्थानीय भाषाओं में संवाद करने वाले अधिकारी लोगों का विश्वास अधिक आसानी से जीत सकते हैं।
ईमानदारी और जवाबदेही को बताया जरूरी
ओम बिरला ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान शासन व्यवस्था को और मजबूत बना रहा है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति समर्पण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा पर देश के लोगों का गहरा विश्वास है और अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करें।
