वाशिंगटन। अमेरिकी सशस्त्र बलों ने मौजूदा और भविष्य की सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 130 लाख करोड़ रुपये) के रक्षा बजट की आवश्यकता जताई है। अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सीनेट से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस रक्षा बजट प्रस्ताव को मंजूरी देने की अपील की।
सीनेट की विनियोजन समिति के समक्ष गवाही देते हुए जनरल डैन केन ने कहा कि अतिरिक्त धनराशि सैन्य कर्मियों के वेतन, अभियान संचालन, रखरखाव और अत्याधुनिक तकनीकों में निवेश के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में अमेरिका को अपने संभावित प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहने के लिए रक्षा क्षमता को मजबूत करना होगा।
रूस, चीन और ईरान का दिया हवाला
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अतिरिक्त बजट से अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभियान जारी रखने के साथ-साथ रूस, चीन और ईरान जैसी चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से अधिक अस्थिर और खतरनाक होती जा रही है, इसलिए वित्तीय वर्ष 2026 के लिए यह अतिरिक्त बजट आवश्यक है।
सीनेट में बजट पर मतभेद
रक्षा बजट प्रस्ताव को लेकर सीनेट में अलग-अलग राय सामने आई। रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने कहा कि पेंटागन को यह स्पष्ट करना होगा कि इतनी बड़ी राशि का उपयोग किस प्रकार किया जाएगा और अमेरिका की सैन्य रणनीति क्या होगी।
वहीं, डेमोक्रेटिक सीनेटर डिक डर्बिन ने कहा कि जनरल डैन केन और पीट हेगसेथ अतिरिक्त खर्च की पर्याप्त आवश्यकता साबित नहीं कर सके। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस वैन होलेन ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन के पास स्पष्ट रणनीति का अभाव है। दूसरी ओर रिपब्लिकन सीनेटर जॉन होवेन ने कहा कि ईरान के संभावित परमाणु हथियार कार्यक्रम को देखते हुए रक्षा पर निवेश करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
