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Saturday, May 30, 2026

सुपौल: आईसीडीएस डीपीओ ने 7 आंगनबाड़ी केंद्रों का किया औचक निरीक्षण, ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ योजना पर विशेष जोर

सुपौल| जिले में आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और सरकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर उतारने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को बड़ी कार्रवाई की गई। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (DPO, ICDS) ने बाल विकास परियोजना सुपौल के अंतर्गत संचालित सात अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया। इस औचक कार्रवाई से विभागीय कर्मियों और सेविकाओं में हड़कंप का माहौल रहा।

केंद्र संख्या 87 से 93 तक की हुई जांच, समय पर पौष्टिक भोजन देने का निर्देश
अधिकारी ने अपने दौरे के दौरान मुख्य रूप से केंद्र संख्या 87, 88, 89, 90, 91, 92 एवं 93 की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। राहत की बात यह रही कि निरीक्षण के दौरान सभी केंद्रों पर संबंधित सेविकाएं और सहायिकाएं अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद पाई गईं। डीपीओ ने केंद्रों पर चल रही गतिविधियों की समीक्षा करते हुए सख्त निर्देश दिया कि बच्चों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार समय पर पौष्टिक नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराने को कहा।

‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ अभियान के तहत निखरेगी बच्चों की शिक्षा
निरीक्षण के दौरान जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने केंद्र स्तर पर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने “पोषण भी, पढ़ाई भी” राष्ट्रीय अभियान के तहत बच्चों के लिए खेल-खेल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों की व्यक्तिगत साफ-सफाई, स्वच्छता और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। इसके अलावा, पोषक क्षेत्र के सभी पात्र लाभार्थियों के बीच एफआरएस (FRS) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से ‘टेक होम राशन’ (THR) का समय पर वितरण करने की हिदायत दी।

मातृ वंदना और कन्या उत्थान योजना के तहत रजिस्ट्रेशन बढ़ाने का टारगेट
विभागीय कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए डीपीओ ने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को नया लक्ष्य सौंपा। इसके तहत प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत हर केंद्र से कम से कम 8 नए पात्र लाभार्थियों तथा मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत अनिवार्य रूप से 3 पात्र बच्चियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने का टास्क दिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि केंद्रों का संचालन पूरी तरह से विभागीय गाइडलाइंस के अनुरूप होना चाहिए और संबंधित महिला पर्यवेक्षिकाएं (Supervisors) इसकी नियमित मॉनिटरिंग करेंगी।

‘आंगन ऐप’ पर अपलोड होगी रिपोर्ट, लापरवाही पर कड़ा रुख
प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPOs) और महिला पर्यवेक्षिकाओं को कड़ा निर्देश जारी किया है। उन्होंने कहा कि ‘आंगन ऐप’ (Aangan App) के माध्यम से किए जाने वाले सभी निरीक्षणों और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा से संबंधित रिपोर्ट को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। इससे योजनाओं की ऑनलाइन निगरानी और क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ सही समय पर पहुंच सके।

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