रांची। रक्षाबंधन को लेकर राजधानी रांची के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक यह त्योहार नजदीक आते ही राखी की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है। बाजार में पारंपरिक धागे वाली राखियों से लेकर मेटल, फैंसी और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 50 पैसे से लेकर 2500 रुपये तक है। कारोबारियों को इस बार पिछले साल की तुलना में बेहतर बिक्री की उम्मीद है और झारखंड में रक्षाबंधन के दौरान 100 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है।
रांची के अपर बाजार समेत प्रमुख बाजारों में राखियों की दुकानें सज गई हैं। कोलकाता और दिल्ली से मंगाई गई राखियों के साथ झारखंड के विभिन्न शहरों और महिला समूहों द्वारा तैयार की गई राखियां भी बाजार में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग बाजार पहुंचकर अपनी पसंद की राखी खरीद रहे हैं।
राखी के साथ कपड़े और मिठाई की भी बढ़ी मांग
रक्षाबंधन के अवसर पर राखी के अलावा कपड़े, मिठाई और उपहारों की खरीदारी भी जोर पकड़ रही है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहार के दौरान इन सभी क्षेत्रों में बिक्री बढ़ेगी। कारोबारियों के अनुसार भाई-बहन के बीच उपहारों के आदान-प्रदान का चलन भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे त्योहार के दौरान बाजार में आर्थिक गतिविधियां तेज हो जाती हैं।
रांची के अपर बाजार में राखी का कारोबार करने वाले सोनू सिंह ने बताया कि इस वर्ष पिछले साल की तुलना में बेहतर कारोबार की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बाजार उपलब्ध होने के बावजूद लोग राखी को सामने से देखकर और अपनी पसंद के अनुसार खरीदना पसंद कर रहे हैं। वहीं, राखी खरीदने बाजार पहुंचीं सौम्या ने कहा कि ऑनलाइन खरीदारी की तुलना में खुद बाजार जाकर भाई के लिए पसंद की राखी चुनने का अलग उत्साह है।
पारंपरिक धागे से ज्वेलरी डिजाइन तक पहुंची राखी
समय के साथ राखियों के डिजाइन में भी काफी बदलाव आया है। पहले जहां सामान्य धागे से बनी राखियां प्रमुख रूप से बाजार में मिलती थीं, वहीं अब मेटल, फैंसी डिजाइन, बच्चों की पसंद वाले कार्टून पात्रों और ज्वेलरी शैली की राखियां भी उपलब्ध हैं। अलग-अलग आयु वर्ग और पसंद के अनुसार राखियों की बड़ी रेंज बाजार में मौजूद है।
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदित्य मलहोत्रा के अनुसार त्योहार केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर नहीं है, बल्कि इससे बाजार में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर में 40 से 50 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार होने का अनुमान रहता है। झारखंड में भी राखी के साथ कपड़े, मिठाई और अन्य उपहारों की खरीदारी से बाजार को मजबूती मिलती है।
झारखंड में 100 करोड़ से अधिक कारोबार की उम्मीद
व्यापारियों का अनुमान है कि इस वर्ष अकेले झारखंड में रक्षाबंधन के अवसर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है। बाजार में अलग-अलग कीमत और डिजाइन की राखियां उपलब्ध होने से हर वर्ग के ग्राहक अपनी क्षमता और पसंद के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। त्योहार के नजदीक आने के साथ बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है।
भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का त्योहार
रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है, जबकि भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में भले ही बदलाव आया हो, लेकिन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी रिश्ते की भावना आज भी इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट जाने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था। इसके बाद श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया। इसी तरह यमराज और यमुना से जुड़ी कथा भी रक्षाबंधन के महत्व को दर्शाती है। यही कारण है कि यह पर्व आज भी भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।
