नई दिल्ली। भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर सोमवार को उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष और केंद्र व राज्य सरकारों के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने उनके राष्ट्रसेवा, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष ने किया नमन
सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें शिक्षाविद, दूरदर्शी राजनेता और राष्ट्रनिर्माता बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और उनका जीवन एक मजबूत, आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा।
ओम बिरला ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रसेवा और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने उच्च शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित के लिए उनके योगदान को याद किया।
केंद्रीय मंत्रियों ने किया योगदान का उल्लेख
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत को अपने जीवन का ध्येय बनाया। बंगाल के विभाजन के समय उनके नेतृत्व और जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण के लिए उनके संघर्ष को भारतीय इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रवाद की विचारधारा को मजबूत आधार प्रदान किया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण आज भी प्रेरणादायी है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का उनका उद्घोष राष्ट्रीय एकता के लिए ऐतिहासिक रहा। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने भारत की संप्रभुता और एकता के लिए उनके संघर्ष और त्याग को अविस्मरणीय बताया।
मुख्यमंत्रियों ने भी दी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे’ का संकल्प राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ‘अखंड भारत’ के प्रति उनका समर्पण आज भी देशवासियों को नई ऊर्जा देता है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश देता है। उन्होंने भारतीय राजनीति को वैचारिक दिशा देने और राष्ट्रीय एकता के लिए उनके योगदान को ऐतिहासिक बताया।
