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Friday, July 10, 2026

उत्तर कोरिया बढ़ाएगा खुफिया एजेंसी का दायरा, किम जोंग उन ने दिए सैन्य आधुनिकीकरण के निर्देश

सियोल/प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने अपनी खुफिया और सैन्य निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने का फैसला किया है। राष्ट्रपति किम जोंग उन की अध्यक्षता में सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के केंद्रीय सैन्य आयोग की बैठक में जनरल रिकॉनिसेंस एंड इंटेलिजेंस ब्यूरो (जीआरआईबी) के अधिकार और जिम्मेदारियों का विस्तार करने पर सहमति बनी। बैठक में सेना के आधुनिकीकरण, युद्धक तैयारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

खुफिया नेटवर्क और सैन्य निगरानी होगी मजबूत

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, जीआरआईबी को संभावित दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखने, महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य टोही क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। हालांकि, इन क्षमताओं का विस्तार किस प्रकार किया जाएगा, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया ने अपनी पुरानी जासूसी एजेंसी जनरल रिकॉनिसेंस ब्यूरो का विस्तार कर उसे जीआरआईबी के रूप में विकसित किया है, ताकि बाहरी खुफिया और विश्लेषण क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत खुफिया नेटवर्क के जरिए उत्तर कोरिया साइबर हमलों, ड्रोन आधारित निगरानी और दक्षिण कोरिया के महत्वपूर्ण ढांचों से जुड़ी सूचनाएं जुटाने जैसे अभियानों को और प्रभावी बना सकता है।

परमाणु शक्ति और सैन्य ढांचे को मिलेगा और बल

बैठक में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति, तबादले और संगठनात्मक बदलावों पर भी चर्चा हुई। साथ ही सैन्य-तकनीकी क्षमता बढ़ाने, राजनीतिक-वैचारिक मजबूती और सभी स्तरों पर युद्धक तैयारी को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

केंद्रीय सैन्य आयोग ने युद्ध प्रणालियों के आधुनिकीकरण, परमाणु शक्ति को गुणवत्ता और संख्या दोनों के आधार पर मजबूत करने तथा सैन्य ठिकानों के विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। बैठक के दौरान किम जोंग उन ने सात प्रमुख सैन्य आदेशों पर भी हस्ताक्षर किए।

किम जोंग उन ने कहा कि केवल इच्छाशक्ति से देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति तभी संभव है, जब सेना इतनी मजबूत हो कि हर खतरे का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

बैठक में नौसेना के आधुनिकीकरण, कोयला खनन क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और अन्य राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

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