नई दिल्ली| भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई मजबूती देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का औपचारिक स्वागत किया। इस खास मौके पर दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्तों को याद किया गया। राष्ट्रपति मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत-म्यांमार के गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच की साझा बौद्ध विरासत हमारे सदियों पुराने आपसी संबंधों को एक अनोखी गर्मजोशी प्रदान करती है। उन्होंने म्यांमार को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बताया और म्यांमार में शांति व सुलह की कोशिशों के लिए भारत के अटूट व निरंतर समर्थन का भरोसा दिया।
अपनी इस महत्वपूर्ण भारत यात्रा के तहत म्यांमार के राष्ट्रपति शनिवार को सबसे पहले बिहार के बोधगया पहुंचे थे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर और सुजाता मंदिर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। आध्यात्मिक यात्रा पूरी करने के बाद वे उसी शाम नई दिल्ली पहुंचे, जहां विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनसे शिष्टाचार मुलाकात की। अपनी यात्रा के अगले चरण में रविवार को म्यांमार के राष्ट्रपति ने भारत-म्यांमार बिजनेस फोरम की एक उच्चस्तरीय बैठक में शिरकत की, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापारिक संभावनाओं को बढ़ाने पर चर्चा की गई।
सोमवार को इस यात्रा का सबसे मुख्य पड़ाव तब आया जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक व्यापक द्विपक्षीय वार्ता आयोजित हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने आपसी हितों से जुड़े कई गंभीर विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, विकास सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति शामिल रहे। इस बैठक से दोनों देशों के बीच आने वाले समय में रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।
