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Saturday, July 18, 2026

ग्रामीण क्षेत्रों में कर लगाने का फैसला गरीबों पर बोझ : सुधाकर सिंह

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार के ग्रामीण क्षेत्रों में कर लगाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार ने 15 जुलाई को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है। उनका दावा है कि इससे पहले से महंगाई, बेरोजगारी और सीमित आय की मार झेल रहे ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

उन्होंने कहा कि बिहार आज भी प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण आय जैसे कई आर्थिक मानकों पर पिछड़ा हुआ है। ऐसे में नए कर और शुल्क का सबसे अधिक असर ठेला, खोमचा, रेहड़ी, रिक्शा, टमटम, बैलगाड़ी, हाथगाड़ी और अन्य छोटे स्वरोजगार से जुड़े लोगों पर पड़ेगा।

छोटे कारोबारियों की बढ़ेगी लागत

राजद सांसद ने कहा कि पंचायतों द्वारा लगाए जाने वाले कर और शुल्क का असर पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उनके अनुसार, इससे छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ेंगे, ग्रामीण बाजारों की क्रय शक्ति प्रभावित होगी और स्थानीय रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 27 पंचायतों को कर लगाने का अधिकार देती है, लेकिन इसका उपयोग ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय स्थानीय विकास के लिए संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए।

भ्रष्टाचार बढ़ने की जताई आशंका

सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि कई सरकारी सेवाओं में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की शिकायतें पहले से मिलती रही हैं। उन्होंने कहा कि भूमि लगान रसीद, दाखिल-खारिज और अन्य सेवाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में पंचायत स्तर पर नए कर और शुल्क लगाने का अधिकार भ्रष्टाचार की आशंका भी बढ़ा सकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों के बैंक ऋण माफ किए जा रहे हैं, जबकि ग्रामीण जनता पर नए करों का बोझ डाला जा रहा है। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह के वर्ष 2023 के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें ग्रामीण निकायों के अपने राजस्व स्रोत विकसित करने की बात कही गई थी।

पत्रकार वार्ता में अर्थशास्त्री, योजना आयोग के पूर्व सचिव तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट के पूर्व महानिदेशक डॉ. संतोष मेहरोत्रा भी मौजूद रहे।

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