गुवाहाटी। असम में लगातार हो रही भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, बीते 23 जुलाई को छह और लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है। फिलहाल 11 जिलों की 7.21 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है।
11 जिले जलमग्न, 883 गांव प्रभावित
बाढ़ से गोलाघाट, होजई, कामरूप, चराईदेव, जोरहाट, डिब्रूगढ़, शिवसागर, नगांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया जिले प्रभावित हैं। कुल 37 राजस्व मंडलों के 883 गांव जलमग्न हैं। लगभग 25,375 हेक्टेयर कृषि भूमि भी पानी में डूबी हुई है।
राज्य की कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें बुढ़ीदिहिंग, दिसांग, दिखौ, धनसिरी और कुशियारा प्रमुख हैं। वहीं, गुवाहाटी में गुरुवार रात हुई भारी बारिश के बाद कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा।
103 राहत शिविरों में हजारों लोग शरण लिए हुए
राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 103 राहत शिविर और 255 राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं। राहत शिविरों में 24,124 लोग रह रहे हैं, जबकि 2.39 लाख से अधिक लोगों को राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट, गोलाघाट और डिब्रूगढ़ जिलों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। राज्य के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि भी राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
बचाव अभियान तेज, हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राज्य आपदा मोचन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। 80 नावों की मदद से 4,455 लोगों और पांच पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। शिवसागर जिले में राहत कार्य के लिए एक हेलीकॉप्टर भी लगाया गया है।
राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 173 चिकित्सा दल तैनात किए हैं। राहत सामग्री के रूप में चावल, दाल, नमक, सरसों का तेल और पशुओं के लिए चारा वितरित किया जा रहा है।
सड़क और पुलों को भारी नुकसान
बाढ़ से सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। इस मुद्दे पर विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष ने चर्चा की मांग की है। विधानसभा अध्यक्ष रंजीत दास ने कहा है कि सदन में बाढ़ की स्थिति पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।
