भोपाल । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के दो अलग-अलग मामलों में एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 85.45 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क (अटैच) कर लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी का यह कड़ा चाबुक लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पूर्व इंजीनियर इन चीफ गोविंद प्रसाद मेहरा और पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया सहित उनके पारिवारिक सदस्यों के खिलाफ चला है। इस बड़ी पुलिसिया और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे और दागी अधिकारियों के बीच हड़कंप का माहौल है।
पूर्व इंजीनियर गोविंद प्रसाद मेहरा की 67.25 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 72 एकड़ का लग्जरी रिसॉर्ट जब्त
ईडी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग के पूर्व इंजीनियर इन चीफ गोविंद प्रसाद मेहरा के खिलाफ भोपाल लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज मूल प्राथमिकी (एफआईआर) को आधार बनाकर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि मेहरा ने 4 मार्च 1985 से 29 फरवरी 2024 के बीच अपनी सरकारी सेवा के दौरान मात्र 4 करोड़ रुपये की वैध आय के मुकाबले 10 करोड़ रुपये से अधिक की अकूत संपत्ति अर्जित की। मेहरा नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील अंतर्गत सैनी गांव में स्थित 72 एकड़ के आलीशान ‘कस्तूरी कृषि फार्म’ को लेकर सबसे ज्यादा सुर्खियों में आए थे, जिसे उन्होंने एक बेहद महंगे रिसॉर्ट का रूप दे रखा था। इस लग्जरी फार्म हाउस में निजी कॉटेज, पक्की सड़कें, स्वीमिंग पूल और एक कृत्रिम तालाब (जलाशय) भी बनाया गया था, जिसका बाजार मूल्य करीब 49.44 करोड़ रुपये आंका गया है। मेहरा के ठिकानों से 3.51 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और 8.79 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं।
पूर्व आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया पर भी कसा शिकंजा, वैध आय से 459% अधिक मिली संपत्ति
इसी कड़ी में ईडी ने मंगलवार को एक अन्य बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया और उनके करीबियों की 18.20 करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। भदौरिया के खिलाफ यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस इंदौर द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले के आधार पर की गई है। वित्तीय जांच में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ कि भदौरिया ने वर्ष 1987 से 31 अगस्त 2025 के बीच अपनी नौकरी के दौरान ज्ञात और वैध स्रोतों की तुलना में रिकॉर्ड तोड़ संपत्ति बनाई। उनकी वास्तविक वैध आय महज 2 करोड़ रुपये के आसपास होनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इस अवधि में करीब 11.18 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया। इस प्रकार उनके पास 9.18 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति पाई गई, जो उनकी मूल वैध आय से लगभग 459 प्रतिशत अधिक है।
बैंक लॉकरों से निकले करोड़ों के आभूषण और बुलियन, साक्ष्य पेश नहीं कर पाए आरोपी
केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के दौरान पूर्व आबकारी अधिकारी भदौरिया के विभिन्न ठिकानों और गुप्त बैंक लॉकरों की तलाशी में भारी मात्रा में बेनामी नकदी, सोने-चांदी के कीमती आभूषण, बुलियन (सोने के बिस्कुट) और कई अन्य निवेश संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पूछताछ के दौरान भदौरिया ने जब्त की गई इस अकूत नकदी और जेवरातों पर अपना मालिकाना हक तो स्वीकार कर लिया, लेकिन जब जांच अधिकारियों ने इसकी वैध खरीद और आय के स्रोत से जुड़े प्रमाणित दस्तावेज मांगे, तो वे कोई भी संतोषजनक साक्ष्य पेश नहीं कर सके। ईडी अब दोनों ही मामलों में शामिल अन्य मददगारों और अवैध रूप से किए गए अन्य रियल एस्टेट निवेशों का पता लगाने के लिए कुर्क किए गए दस्तावेजों की गहराई से स्क्रूटनी कर रही है।
