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Thursday, May 28, 2026

सादे कपड़ों में कार्रवाई पर रोक, अब अनिवार्य रूप से वर्दी में ही ड्यूटी करेंगे कोलकाता के पुलिसकर्मी

कोलकाता । तलाशी अभियान (रेड), गिरफ्तारी या किसी भी अन्य सरकारी कामकाज के दौरान अब कोलकाता पुलिस के जवानों और अधिकारियों को सादे कपड़ों में जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें अपनी निर्धारित आधिकारिक वर्दी (यूनिफॉर्म) पहनकर ही ड्यूटी करनी होगी। इस संबंध में कोलकाता पुलिस आयुक्त (पुलिस कमिश्नर) कार्यालय की ओर से एक नई निर्देशिका (गाइडलाइन) जारी की गई है। हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि जिन विशेष मामलों में सामान्य कपड़ों में जाना बेहद जरूरी होगा, वहाँ कार्रवाई से पहले वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

बिना वर्दी के कार्रवाई नियमों के खिलाफ, पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश
पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से 24 मई को जारी इस उच्च स्तरीय निर्देशिका में कहा गया है कि किसी भी प्रकार के तलाशी अभियान, धर-पकड़ या सरकारी कानूनी कार्रवाई के दौरान तैनात पुलिसकर्मियों को अनिवार्य रूप से वर्दी पहननी होगी। बिना वर्दी या सादे कपड़ों में अभियान पर जाना सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। विशेष परिस्थितियों में उच्च अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद भी, अभियान के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों को अपनी पहचान (आईडी) सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम नागरिकों में किसी प्रकार का भ्रम या भय न फैले।

विशेष जांच इकाइयों को नए नियमों से मिली छूट
इस नए आदेश से पुलिस की कुछ चुनिंदा तकनीकी और खुफिया शाखाओं को अलग रखा गया है। पुलिस आयुक्त कार्यालय के अनुसार, यह सख्त निर्देश विशेष कार्य बल (एसटीएफ), खुफिया विभाग (डिटेक्टिव डिपार्टमेंट), साइबर अपराध शाखा, प्रवर्तन शाखा (एनफोर्समेंट ब्रांच) और अन्य अति-संवेदनशील विशेष इकाइयों के पुलिसकर्मियों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि उनके काम की प्रकृति गुप्त होती है।

सर्वोच्च न्यायालय के ‘डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल’ फैसले का दिया हवाला
इस नई निर्देशिका में वर्ष 1997 के देश के चर्चित ‘डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल’ मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा दिए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। उस ऐतिहासिक फैसले में देश की शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी भी तलाशी, गिरफ्तारी या हिरासत के दौरान पुलिस बल को मानव अधिकारों की रक्षा और पारदर्शिता के लिए किस प्रकार का संवैधानिक आचरण करना चाहिए।

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