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Tuesday, July 14, 2026

भारत टेक्स 2026 में झारखंड के हस्तकरघा उत्पादों का जलवा, उद्योग मंत्री ने किया पैवेलियन का उद्घाटन

नई दिल्ली/रांची। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 में झारखंड के उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने झारखंड पैवेलियन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि देश और दुनिया तक पहुँचना चाहिए। राज्य की समृद्ध हस्तकरघा और वस्त्र विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।

बुनकरों को मिलेगा राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार

उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत टेक्स 2026 झारखंड के पारंपरिक वस्त्र उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। इससे बुनकरों और कारीगरों को नए व्यावसायिक अवसर मिलेंगे और राज्य का वस्त्र उद्योग वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़ेगा।

छह जीआई टैग प्राप्त उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र

झारखंड पैवेलियन में राज्य के छह जीआई टैग प्राप्त हस्तकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। इनमें तसर सिल्क, कुचाई सिल्क, भगैया साड़ी एवं वस्त्र, टुमका चादर, भोया साड़ी एवं वस्त्र तथा पंछी साड़ी एवं वस्त्र प्रमुख रहे। इन उत्पादों ने झारखंड की समृद्ध वस्त्र विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और बुनकरों की प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

वैश्विक मंच पर झारखंड की बढ़ रही पहचान

भारत टेक्स 2026 वस्त्र और परिधान उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला के लिए व्यापार, निवेश, नवाचार, नीतिगत संवाद और रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख वैश्विक मंच बन चुका है। यह आयोजन भारत की वस्त्र और फैशन क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक नेतृत्व क्षमता, सतत विकास, तकनीकी नवाचार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई दिशा दे रहा है। झारखंड के हस्तकरघा उत्पाद भी इस वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा रहे हैं।

कार्यक्रम में उद्योग विभाग के निदेशक विशाल सागर, अपर सचिव प्रीति सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आयोजन में देश-विदेश के निर्माता, निर्यातक, वैश्विक खरीदार, निवेशक, नीति-निर्माता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल, नवप्रवर्तक, प्रौद्योगिकी प्रदाता तथा हस्तशिल्प और हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में कारीगर शामिल हुए।

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