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Thursday, July 23, 2026

पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में जयशंकर बोले, वैश्विक व्यवस्था अस्थिर, संवाद ही समाधान

नई दिल्ली। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के 21वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, म्यांमार संकट, दक्षिण चीन सागर विवाद और पश्चिम एशिया के संघर्ष सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

समुद्री सुरक्षा और वैश्विक सहयोग पर जोर

विदेश मंत्री ने सामाजिक माध्यम एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि नई क्षमताओं, बदलते संबंधों और उभरती चुनौतियों के कारण वैश्विक व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं। राजनीति और सुरक्षा अब अर्थव्यवस्था तथा दक्षता पर अधिक प्रभाव डाल रही है, जबकि जोखिम लेने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि भारत इस वर्ष दो प्रमुख पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन गतिविधियों की मेजबानी करेगा। इनमें कोच्चि में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर सातवां सम्मेलन और लोथल में समुद्री विरासत महोत्सव शामिल हैं।

पश्चिम एशिया, दक्षिण चीन सागर और म्यांमार पर भारत का रुख

जयशंकर ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था विभिन्न संघर्षों के प्रभाव से प्रभावित है। ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित और निर्बाध रहने चाहिए तथा नाविकों, नागरिक जहाजों और समुद्री ढांचागत सुविधाओं पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार्य नहीं है।

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर भारत ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय के अनुरूप कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन किया। वहीं म्यांमार संकट के समाधान के लिए राजनीतिक प्रक्रिया और आसियान के प्रयासों का समर्थन दोहराया।

साइबर ठगी और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन

विदेश मंत्री ने कहा कि साइबर ठगी केंद्रों के खिलाफ सामूहिक और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, क्योंकि इनसे बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने राहत और पुनर्वास कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी का प्रमुख उभरता दाता है और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।

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