अहिल्यानगर। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उससे बातचीत की जानी चाहिए। जवाबदेही तय करना ही सुशासन की पहचान है।
गुरुवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में अन्ना हजारे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक दो घंटे का मौन आंदोलन किया। इसके बाद वे अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए।
प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
अन्ना हजारे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और कथित पुलिस कार्रवाई को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में टकराव नहीं, बल्कि संवाद सबसे प्रभावी समाधान होता है।
पत्र में हजारे ने लिखा कि यदि किसी मंत्री की जवाबदेही तय कर उसका इस्तीफा लिया जाता है, तो इससे सरकार कमजोर नहीं होती। इसके विपरीत यह पूरे मंत्रिमंडल को जवाबदेही का स्पष्ट संदेश देता है और शासन व्यवस्था अधिक उत्तरदायी बनती है।
युवाओं की समस्याओं पर जताई चिंता
अन्ना हजारे ने कहा कि देश के लाखों युवा प्रश्नपत्र लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी जैसी समस्याओं से परेशान हैं। इन मुद्दों को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानने के बजाय जनता की वास्तविक चिंता के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी गड़बड़ी या घोटाले के सामने आने पर अक्सर जिम्मेदारी निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती है, जबकि वास्तविक जवाबदेही उच्च पदों पर बैठे लोगों की तय होनी चाहिए।
