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Sunday, August 16, 2026

जेपीएससी-जेएसएससी मामले में अनशनकारियों को धरना स्थल भेजने से अस्पताल का इनकार

रांची। जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे तीन अनशनकारियों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें धरना स्थल पर भेजने से साफ इनकार कर दिया है। अस्पताल प्रशासन ने शनिवार को तीनों का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि लंबे समय से अन्न त्यागने के कारण अनशनकारियों में भुखमरी के गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं और मौजूदा चिकित्सकीय स्थिति में उन्हें अस्पताल से छुट्टी देना उचित नहीं होगा। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मरीजों की जान को खतरे में डालकर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. विमलेश और इंचार्ज डॉ. हरीश के नेतृत्व में अनशनकारियों की निगरानी कर रही डॉ. अमृता और डॉ. हफीजुल की टीम ने प्रेस वार्ता कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि डॉक्टर मरीजों पर जबरदस्ती नहीं कर सकते और केवल चिकित्सकीय सलाह दे सकते हैं, लेकिन गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति में उन्हें अस्पताल से छुट्टी देना चिकित्सा दृष्टि से उचित नहीं है।

दरअसल, अनशनकारियों और उनके समर्थकों की ओर से धरना स्थल पर जाने तथा वहां झंडा फहराने के लिए अस्पताल से छुट्टी देने की मांग की गई थी। इसी मांग के बाद अस्पताल प्रशासन ने प्रेस वार्ता कर उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल रिपोर्ट के बारे में जानकारी सार्वजनिक की।

डॉक्टरों के अनुसार, पिछले करीब 15 दिनों से अन्न का त्याग कर चुके देवेंद्र नाथ मेहता की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। उन्होंने अब फ्लूइड्स लेने से भी इनकार कर दिया है, हालांकि पानी पी रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि उनकी जांच में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पाया गया है और सोडियम का स्तर घटकर 124 तक पहुंच गया है। उनके यूरिन में कीटोन बॉडीज भी मिली हैं, जो लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने के कारण शरीर में उत्पन्न होने वाली भुखमरी की स्थिति का संकेत है।

अन्य दो अनशनकारियों हबीबा और राहुल क्रांति की स्वास्थ्य स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों के यूरिन में कीटोन बॉडीज पाई गई हैं। राहुल क्रांति में कीटोन का स्तर 3 से अधिक बताया गया है। चिकित्सकों के मुताबिक, फिलहाल फ्लूइड देने के बाद ही दोनों का ब्लड प्रेशर नियंत्रित किया जा रहा है।

चिकित्सकों ने बताया कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने पर शरीर को पर्याप्त ग्लूकोज नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति में शरीर ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करने के लिए जमा चर्बी को तोड़ना शुरू करता है, जिससे कीटोन बॉडीज बनने लगती हैं। लंबे समय तक भूखे रहने पर इनका स्तर बढ़ना शरीर में गंभीर भुखमरी और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का संकेत माना जाता है।

अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि अनशनकारियों को उनकी मांग के अनुसार धरना स्थल भेजना इस समय उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए चिकित्सकीय स्थिति सामान्य होने तक उन्हें अस्पताल में निगरानी और उपचार में रखना जरूरी है।

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