हजारीबाग: जिले के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले (Treasury Scam) में प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने बताया कि जांच के दौरान वित्तीय अनियमितता और अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने के ठोस सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर अब कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई है।
गया में खरीदी गई लाखों की जमीन
प्रशासनिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि घोटाले के मास्टरमाइंड शंभू कुमार ने भ्रष्टाचार की कमाई का निवेश बिहार के गया जिले में किया है।
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जमीन का ब्यौरा: बोधगया के रंधीर कुमार सिंह से 7.84 डिसमिल जमीन खरीदी गई।
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किसके नाम पर संपत्ति: यह जमीन शंभू कुमार की पत्नी काजल कुमारी और सोनी देवी (पति स्व. नंदकिशोर चौधरी) के नाम पर दर्ज है। जमीन के बदले लाखों रुपये का भुगतान विक्रेताओं के बैंक खातों में किया गया है।
बेनामी संपत्ति और आलीशान भवन का निर्माण
घोटाले की राशि से न केवल जमीन खरीदी गई, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य भी कराया गया:
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अवैध निर्माण: शंभू कुमार ने खास महाल की 09 डिसमिल भूमि पर बिना सरकारी प्रक्रिया पूरी किए ‘G+2’ (तीन मंजिला) भव्य भवन खड़ा कर दिया है।
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प्रशासन की कार्रवाई: लीज नियमों के उल्लंघन के कारण खास महाल कार्यालय अब इस जमीन को वापस लेने (रिज्यूम करने) की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। जांच में पाया गया कि इस जमीन के लिए भारतीय स्टेट बैंक की हजारीबाग शाखा से 8 लाख और 7 लाख रुपये के अवैध भुगतान किए गए थे।
लग्जरी गाड़ियों का शौक
जांच में ‘बेनामी’ संपत्ति का एक और पहलू सामने आया है। आरोपी शंभू कुमार ने 22 अक्टूबर 2022 को रांची के एक शोरूम से अपने खाते से अग्रिम भुगतान (Advance Payment) कर एक इनोवा (Innova) कार खरीदी थी, लेकिन इसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड कराया गया था।
कानूनी कार्रवाई और एफआईआर
उपायुक्त के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि ये तमाम संपत्तियां ट्रेजरी से की गई अवैध निकासी और भ्रष्टाचार के पैसों से बनाई गई हैं।
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दर्ज प्राथमिकी: इस मामले में एफआईआर संख्या-3226 के तहत अनुसंधान पदाधिकारी (IO) गहन जांच कर रहे हैं।
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कोर्ट की प्रक्रिया: मामले से जुड़े तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों पर विधि-सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

