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Thursday, June 18, 2026

प्रदूषित हो रही गंगा, डॉल्फिन के अस्तित्व पर संकट

भागलपुर। विलुप्तप्राय राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। गंगा नदी में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण इस जीव के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, केंद्र और बिहार सरकार द्वारा इसके संरक्षण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सुस्ती इन प्रयासों पर भारी पड़ रही है।

संरक्षण के लिए सरकारी प्रयास और अनुसंधान

गंगा डॉल्फिन को बचाने और उनकी आबादी बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं:

  • राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (NDRC): पटना विश्वविद्यालय परिसर में गंगा नदी के किनारे भारत का पहला अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है, जहां डॉल्फिन के व्यवहार और उनके संरक्षण के तरीकों पर शोध चल रहा है।

  • विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य: भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से कहलगांव के बीच गंगा नदी का लगभग 60 किलोमीटर लंबा क्षेत्र इस अभ्यारण्य के रूप में सुरक्षित घोषित है, जहां अवैध शिकार और जाल डालने पर सख्त पाबंदी है।

  • प्रोजेक्ट डॉल्फिन व नमामि गंगे: केंद्र सरकार की इन परियोजनाओं के तहत नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करने का काम किया जा रहा है।

  • डॉल्फिन मित्र: वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से स्थानीय मछुआरों और युवकों को प्रशिक्षित कर ‘डॉल्फिन मित्र’ व ‘गंगा प्रहरी’ बनाया गया है, जो संकट में फंसी डॉल्फिनों की मदद करते हैं।

प्रशासनिक सुस्ती और फंड की अनदेखी पर सवाल

डॉल्फिन अभयारण्य के विकास को लेकर प्रशासनिक उदासीनता पर अब उंगलियां उठने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार, अभयारण्य के एनओसी (NOC) क्लीयरेंस फंड के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि जमा है। नियमों के मुताबिक इस राशि का इस्तेमाल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतरी और विकास कार्यों के लिए होना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण विकास कार्य अब भी फाइलों में ही दबे हुए हैं।

गंगा बचेगी तभी बचेगी डॉल्फिन: विशेषज्ञ

पर्यावरणविद दीपक कुमार का मत: सरकार के प्रयासों से डॉल्फिन की संख्या फिलहाल स्थिर है और शिकार में कमी आई है। लेकिन मूल बात यह है कि जब तक हम गंगा नदी को पूरी तरह स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त नहीं बनाएंगे, तब तक डॉल्फिन या किसी अन्य जलीय जीव को नहीं बचाया जा सकता। इसके लिए सभी विभागों और हितधारकों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • वर्ष 2009 में गंगा डॉल्फिन को भारत का ‘राष्ट्रीय जलीय जीव’ घोषित किया गया था।

  • इसका शिकार करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है।

  • बिहार में हर साल 5 अक्टूबर को ‘डॉल्फिन दिवस’ के रूप में मनाकर लोगों को जागरूक किया जाता है।

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