पश्चिमी सिंहभूम । झींकपानी स्थित चाईबासा सीमेंट वर्क्स को बंद करने के प्रस्ताव के खिलाफ स्थायी कर्मचारियों ने गुरुवार को मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता एवं इकाई प्रबंधक राज गुरुंग को विस्तृत आपत्ति पत्र सौंपते हुए 16 अगस्त 2026 से संयंत्र बंद करने तथा सेवाएं समाप्त करने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।
कर्मचारियों ने अपने पत्र में कहा है कि कंपनी द्वारा बंदी के लिए बताए गए कारण चूना पत्थर भंडार की समाप्ति, उत्पादन लागत अधिक होना तथा संयंत्र का पुराना और कम दक्षता वाला होना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। उनका कहना है कि संयंत्र को आधुनिक तकनीक और आवश्यक निवेश के माध्यम से पुनः सुचारू रूप से संचालित किया जा सकता है।
आपत्ति पत्र में कर्मचारियों ने दावा किया कि कंपनी के पास लगभग 30 वर्षों की खनन लीज उपलब्ध है तथा एफ-3 क्षेत्र में पर्याप्त चूना पत्थर का भंडार मौजूद है। इसकी पुष्टि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस और झारखंड सरकार के खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अभिलेखों में भी दर्ज है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि संयंत्र को आधुनिक बनाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक निवेश नहीं किया गया, जिससे वर्तमान स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके बावजूद श्रमिकों ने उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में निरंतर सहयोग दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1946 में स्थापित यह संयंत्र क्षेत्र का एक ऐतिहासिक औद्योगिक प्रतिष्ठान है, जिसे उचित आधुनिकीकरण के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा सकता है।
कर्मचारियों के अनुसार संयंत्र में लगभग 1600 लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं, जबकि इसकी संभावित बंदी से आसपास के गांवों सहित 50 हजार से एक लाख लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
आपत्ति पत्र पर सिद्धार्थ हेस्सा, बिरबल गोप, जय सिंह होंडगासा, दीपक पूर्ति, बसंत कुमार महतो, सलील अहमद सहित कई कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं। पत्र की प्रतिलिपि जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक तथा स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को भी भेजी गई है।
