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Tuesday, June 30, 2026

सेशेल्स दौरे पर पीएम मोदी ने दिए भारतीय हस्तशिल्प के विशेष उपहार, संस्कृति और कारीगरी की दिखाई झलक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय सेशेल्स दौरे के दौरान वहां के शीर्ष नेतृत्व को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प, हथकरघा और पारंपरिक कला से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत, कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्पकला और विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया।

राष्ट्रपति को भेंट किया मुरादाबाद का पीतल का कछुआ

प्रधानमंत्री ने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के कारीगरों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित पीतल का कछुआ भेंट किया। यह कलाकृति मेटल कास्टिंग, नक्काशी और फिनिशिंग की उत्कृष्ट कला का उदाहरण है। भारतीय परंपरा में कछुआ बुद्धिमत्ता, धैर्य, स्थिरता और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। वहीं सेशेल्स में पाए जाने वाले विश्व प्रसिद्ध एल्डाब्रा जायंट टॉर्टॉइज से इसका विशेष सांस्कृतिक संबंध भी जुड़ता है।

प्रथम महिला को मिला महेश्वरी सिल्क स्टोल और बिदरीवेयर बॉक्स

प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को मध्य प्रदेश का पारंपरिक महेश्वरी सिल्क स्टोल और कर्नाटक का प्रसिद्ध बिदरीवेयर बॉक्स भेंट किया गया। महेश्वरी सिल्क अपनी हल्की बनावट, आकर्षक डिजाइनों और उत्कृष्ट बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। वहीं बिदरीवेयर बॉक्स अपनी काली धातु पर चांदी की बारीक नक्काशी और पारंपरिक धातु शिल्प के लिए जाना जाता है।

उपराष्ट्रपति को सिक्किम की ऑर्किड पेंटिंग

उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिले को सिक्किम की ऑर्किड आर्ट पेंटिंग भेंट की गई। इस कलाकृति में भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर को ऑर्किड के फूलों के बीच दर्शाया गया है। ऑर्किड सेशेल्स का राष्ट्रीय पुष्प भी है, इसलिए यह उपहार दोनों देशों की जैव विविधता संरक्षण के साझा दृष्टिकोण का प्रतीक माना जा रहा है।

द्वितीय महिला को कांचीपुरम सिल्क फैब्रिक

द्वितीय महिला लीना पिले को तमिलनाडु का जीआई टैग प्राप्त कांचीपुरम सिल्क फैब्रिक भेंट किया गया। सुनहरी जरी, पारंपरिक रंगों और मंदिरों, प्रकृति तथा पुष्प आकृतियों से प्रेरित डिजाइनों वाला यह रेशमी वस्त्र भारत की प्राचीन बुनाई कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

स्पीकर को भेंट की टोडा कढ़ाई वाली शॉल

सेशेल्स की नेशनल असेंबली के स्पीकर अजारेल एर्नेस्टा को तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों के टोडा समुदाय द्वारा हस्तनिर्मित पारंपरिक टोडा कढ़ाई वाली शॉल भेंट की गई। सफेद सूती कपड़े पर लाल और काले रंग की ज्यामितीय कढ़ाई से सजी यह शॉल भारत की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल का प्रतीक है।

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