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Saturday, August 1, 2026

सावन में शिवमय हुई रांची, जलाभिषेक के लिए उमड़े श्रद्धालु

रांची: श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही रांची के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। पहाड़ी मंदिर, चुटिया स्थित इक्कीसो महादेव धाम और केतारी बागान का सुरेश्वर महादेव धाम भगवान शिव के जयकारों से गूंज रहे हैं। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को पड़ने वाली पहली सोमवारी पर हैं, जब लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

रांची का पहाड़ी मंदिर आस्था के साथ-साथ इतिहास और राष्ट्रभक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। समुद्र तल से करीब 2140 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 468 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस पहाड़ी पर कई क्रांतिकारियों को फांसी दिए जाने के कारण इसे कभी “फांसी टुंगरी” कहा जाता था। आजादी की पूर्व संध्या पर यहां पहली बार तिरंगा फहराया गया था, इसलिए यह देश का अनूठा मंदिर है जहां धार्मिक ध्वज के साथ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया जाता है।

चुटिया स्थित स्वर्णरेखा नदी के किनारे इक्कीसो महादेव धाम भी सावन में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां स्थापित 21 शिवलिंग नागवंशी शासनकाल की धार्मिक विरासत से जुड़े हैं। फिलहाल नदी का जलस्तर बढ़ने से 21 में से 12 शिवलिंग ही दिखाई दे रहे हैं, फिर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष, संतान सुख और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वहीं, केतारी बागान स्थित सुरेश्वर महादेव धाम अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। 108 फीट ऊंचे शिवलिंग के आकार में निर्मित यह मंदिर झारखंड का सबसे ऊंचा शिवालय और देश के दूसरे सबसे बड़े शिवलिंग स्वरूप मंदिरों में गिना जाता है। यहां नर्मदा से लाए गए नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई है। मंदिर परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों की आकर्षक प्रतिकृतियां और स्वचालित दुग्धाभिषेक प्रणाली श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।

पहली सोमवारी को संभावित भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और मंदिर समितियों ने सुरक्षा, ट्रैफिक, सीसीटीवी निगरानी, अलग प्रवेश-निकास मार्ग और अरघा सिस्टम से जलाभिषेक जैसी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुगमता से बाबा भोलेनाथ का दर्शन और जलाभिषेक कर सकें।

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