रांची। फिरायालाल चौक के पास स्थित 15 दुकानों के किराया विवाद को लेकर दायर रिट याचिका पर शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने मामले में राज्य सरकार, रांची नगर निगम और सदर अस्पताल, रांची से जवाब मांगा है।
अदालत ने संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि रांची नगर निगम की ओर से आवंटित इन दुकानों का किराया वसूलने का वैधानिक अधिकार आखिर किस प्राधिकरण के पास है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि फिरायालाल चौक के पास रांची नगर निगम ने कुल 35 दुकानों का आवंटन किया था। रंजीत कुमार समेत अन्य दुकानदारों के अनुसार, वर्ष 2012 तक नगर निगम उनसे नियमित रूप से किराया वसूलता था। इसके बाद दुकानों को अतिक्रमण की श्रेणी में बताते हुए किराया लेना बंद कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि विवाद को लेकर पहले भी हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी। वर्ष 2023 में अदालत ने उस याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना था। उस समय सदर अस्पताल, रांची ने दावा किया था कि संबंधित दुकानें उसके अधिकार क्षेत्र में आती हैं।
इसके बाद दुकानदार किराया जमा करने सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने किराया लेने से इनकार कर उन्हें रांची नगर निगम से संपर्क करने को कहा। इस स्थिति के कारण दुकानदार लंबे समय से असमंजस में हैं। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से किराया जमा करना चाहते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किराया किस विभाग या प्राधिकरण को दिया जाए।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, नगर निगम और सदर अस्पताल को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने दुकानों के स्वामित्व, प्रबंधन और किराया वसूली के अधिकार को स्पष्ट करने को कहा है, ताकि विवाद का विधिसम्मत समाधान किया जा सके।
