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Saturday, August 1, 2026

पहली तिमाही में टाटा स्टील का मुनाफा 35% बढ़ा, भारत में 4,668 करोड़ रुपये का लाभ

पूर्वी सिंहभूम। टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान कंपनी का भारत में कर पश्चात लाभ (पीएटी) सालाना आधार पर करीब 35 प्रतिशत बढ़कर 4,668 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, समेकित कर पश्चात लाभ 19 प्रतिशत बढ़कर 2,385 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी के अनुसार, पहली तिमाही में समेकित राजस्व 60,794 करोड़ रुपये रहा, जबकि समेकित ईबीआईटीडीए 9,370 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। भारत में कंपनी का राजस्व 36,989 करोड़ रुपये और ईबीआईटीडीए 9,908 करोड़ रुपये रहा। भारत में ईबीआईटीडीए मार्जिन 27 प्रतिशत रहा, जबकि प्रति टन ईबीआईटीडीए 19,162 रुपये पहुंच गया।

उत्पादन के मोर्चे पर अप्रैल-जून तिमाही में भारत में 5.76 मिलियन टन कच्चे इस्पात का उत्पादन हुआ और 5.17 मिलियन टन इस्पात की डिलीवरी की गई। मेरामंडली और कलिंगानगर संयंत्रों में निर्धारित रखरखाव के कारण उत्पादन और आपूर्ति पर सीमित असर पड़ा। कंपनी ने आगामी महीनों में परिचालन सामान्य होने की उम्मीद जताई है।

टाटा स्टील के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक टी. वी. नरेंद्रन ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बना हुआ है। घरेलू डिलीवरी में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ऑटोमोटिव और स्पेशल प्रोडक्ट्स कारोबार ने पहली तिमाही का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। टाटा टिस्कॉन और टाटा स्टीलियम जैसे प्रमुख ब्रांडों की बिक्री में भी 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

कंपनी के निदेशक (वित्त) कौशिक चटर्जी के अनुसार, पहली तिमाही में 3,579 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया गया। तिमाही के अंत में कंपनी का शुद्ध ऋण 84,173 करोड़ रुपये और समूह की कुल तरलता 45,950 करोड़ रुपये रही।

निदेशक मंडल ने नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड में 4.8 मिलियन टन क्षमता विस्तार परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर 33,873 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। कंपनी के अनुसार, इससे लंबे इस्पात उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि के साथ ब्रांडेड खुदरा कारोबार में उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत होगी।

कंपनी ने कहा कि घरेलू बाजार में बढ़ती मांग, मूल्यवर्धित उत्पादों पर फोकस, बेहतर परिचालन दक्षता और रणनीतिक निवेश भविष्य में विकास को गति देंगे।

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