नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में सीजफायर (युद्धविराम) की अवधि को और आगे बढ़ाने पर बनी सहमति के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुख देखा जा रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम घटकर करीब छह सप्ताह के निचले स्तर पर आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड आज 90 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे लुढ़ककर 89.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। वहीं, अमेरिकी बाजार का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी गिरकर 86.35 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड करता हुआ नजर आया।
समझौते की आस में 100 डॉलर के नीचे थमी कीमतें, पर अनिश्चितता अब भी बरकरार देखा जाए तो इस पूरे महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अधिकांश समय 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे ही सिमटी रही है। ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत और किसी समझौते पर पहुंचने की उम्मीदों ने कीमतों को बेकाबू होने से रोके रखा। हालांकि, आर्थिक जानकारों का कहना है कि दोनों महाशक्तियों के बीच अभी तक कोई अंतिम ‘डील’ फाइनल नहीं हुई है, जिसके कारण बाजार में आंशिक अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव का दौर अब भी लगातार बना हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की बढ़ी उम्मीद, घटेगी मालवहन और परिवहन लागत पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव को पूरी तरह खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच डायरेक्ट और इनडायरेक्ट (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) चैनलों के जरिए लगातार बातचीत हो रही है। इस कूटनीतिक प्रगति के बाद अब यह उम्मीद प्रबल हो गई है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) के जरिए जहाजों का आवागमन जल्द ही सामान्य रूप से शुरू हो सकता है। गौरतलब है कि खाड़ी के देशों से होने वाली कच्चे तेल और नेचुरल गैस (प्राकृतिक गैस) की वैश्विक सप्लाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होकर गुजरता है।
लंबे और घुमावदार रास्तों से मिली मुक्ति, तो आम जनता को मिलेगी राहत पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाला मालवहन लगभग ठप पड़ गया था, जिसने दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया। सप्लाई ठप होने की वजह से कच्चे तेल और गैस की खेप को बेहद लंबे और घुमावदार समुद्री मार्गों से होकर गंतव्य तक पहुंचाना पड़ रहा था। इस वजह से कंपनियों की परिवहन लागत (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) काफी बढ़ गई थी और वैश्विक बाजार में पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हो गए थे। अब इसके दोबारा सुचारू होने से लागत में कमी आएगी।
60 दिनों के लिए बढ़ सकता है सीजफायर, फाइनल डील का इंतजार राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका पश्चिम एशिया में किसी स्थायी और फाइनल डील पर पहुंचने से पहले वर्तमान में लागू सीजफायर की अवधि को और 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। हालांकि, इस मामले पर सावधानी बरतते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी अंतिम और औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच केवल सकारात्मक संदेशों और प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
