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Sunday, June 21, 2026

बीआईटी मेसरा और आईआईटी खड़गपुर ने जॉइंट रिसर्च और एकेडमिक सहयोग के लिए एमओयू साइन किया

रांची : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मेसरा (बीआईटी मेसरा) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर (आईआईटी खड़गपुर) ने रिसर्च, एकेडमिक्स और इंस्टीट्यूशनल क्षमता-निर्माण के क्षेत्रों में आपसी सहयोग के लिए एक एमओयू साईन किया है। पांच साल का यह समझौता ज्ञापन जॉइंट पीएचडी सुपरविज़न, लेबोरेटरी के साझा एक्सेस और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डेवलपमेंट के लिए आपसी सहमति को सुनिश्चित करेगा।

बीआईटी मेसरा के वाईस चांसलर प्रो. इंद्रनील मन्ना और आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने इस एमओयू पर साइन किए। बीआईटी मेसरा में रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के डीन प्रो. राजू पोद्दार; बीआईटी मेसरा में वाईस चांसलर के नॉमिनी प्रो. सुदीप दास; आईआईटी खड़गपुर में बायो साइंसेज के डीन प्रो. रामकृष्ण सेन; आईआईटी खड़गपुर में कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर प्रो. पवित्र मित्रा; और आईआईटी खड़गपुर में एरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर प्रो. अर्नब रॉय हस्ताक्षर समारोह में मौजूद रहे।

संस्थान की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले प्रोफ़ेसर इंद्रनील मन्ना ने कहा, “आईआईटी खड़गपुर के साथ यह साझेदारी बीआईटी मेसरा की अकादमिक उत्कृष्टता, प्रभावशाली रिसर्च और इनोवेशन-आधारित विकास के प्रयासों में उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस साझेदारी के हम अपने छात्रों और फैकल्टी को नए अवसर प्रदान करना चाहते हैं, साथ ही एक साथ मिलकर रिसर्च और टेक्नोलॉजी के विकास के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देना चाहते हैं।”
यह समझौता ऐसे दो संस्थानों को एक साथ ला रहा है, जिनकी शुरुआत भारत की आज़ादी के ठीक बाद के दशक में हुई थी। बीआईटी मेसरा की स्थापना 1955 में हुई थी और 1986 में इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। वहीं 1951 में स्थापित आईआईटी खड़गपुर देश का पहला आईआईटी है और इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है।

इस एमओयू में मास्टर और पीएचडी छात्रों का जॉइंट सुपरविज़न, अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट रिसर्च में सहयोग, छात्र और फैकल्टी विनिमय, समर और विंटर इंटर्नशिप, और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों को संयुक्त रूप से रिसर्च के प्रस्ताव देना शामिल है। इसके तहत रिसर्च सुविधाओं का साझा इस्तेमाल, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, स्टाफ़ एवं अधिकारियों का प्रशिक्षण, और सेमिनार, वर्कशॉप, जीआईएएन कोर्स और माइक्रो-क्रेडिट कोर्स जैसी संयुक्त एकेडमिक गतिविधियाँ भी शामिल की जाएंगी।

समझौते के तहत दोनों संस्थान एक संयुक्त इंटीग्रेटेड एम.टेक-पीएचडी प्रोग्राम और डुअल-डिग्री पर भी विचार करेंगे। दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों से बनी एक जॉइंट एमओयू इम्प्लीमेंटेशन कमिटी, हर छह महीने में समीक्षा करके प्रगति पर निगरानी रखेगी। यह समझौता खासतौर पर बीआईटी मेसरा के छात्रों को आईआईटी खड़गपुर के रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी का एक्सेस देगा। छात्रों को आईआईटी खड़गपुर की लैबोरेटरी विज़िट करने, जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट्स करने के अवसर मिलेंगे। पोस्टग्रेजुएट छात्र विशेष एकेडमिक और रिसर्च प्रोग्रामों में हिस्सा ले सकेंगे।

इस अवसर पर आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा, “यह एमओयू ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त रिसर्च पहलों एवं क्षमता निर्माण में मदद करेगा, जिसका फायदों दोनों संस्थानों के साथ-साथ व्यापक एकेडमिक कम्युनिटी को भी मिलेगा।’’ यह साझेदारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो संस्थानों के बीच आपसी सहयोग, बहु-विषयी अनुसंधान और इनोवेशन को बढ़ावा देती है। पूर्वी भारत में स्थित दोनों संस्थानों के लिए, यह समझौता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, जल संसाधन और डिफेंस टेक्नोलॉजी सेक्टरों में साझेदारियों को प्रात्साहित करेगा, जो सीधे तौर पर क्षेत्र की आर्थिक स्थिति से जुड़े हैं।

निर्धारित कोऑर्डिनेटर एमओयू के पहलुओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे। का प्रबंधन करेंगे। बीआईटी मेसरा के लिएः डीन ऑफ़ रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप कोऑर्डिनेटर होंगे, और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अभिजीत मुस्तफी जॉइंट कोऑर्डिनेटर होंगे। वहीं आईआईटी खड़गपुर के लिएः कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. पवित्र मित्रा कोऑर्डिनेटर होंगे, और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अर्नब रॉय जॉइंट कोऑर्डिनेटर होंगे। दोनों टीमें हर छह महीने में जॉइंट एमओयू इम्प्लीमेंटेशन कमिटी को रिपोर्ट करेंगी।

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