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Saturday, June 20, 2026

एमजीएम अस्पताल की चौथी मंजिल से कूदने की कोशिश, साथी मरीज की सूझबूझ से बची जान

पूर्वी सिंहभूम । जमशेदपुर के डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल में शुक्रवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मेडिसिन वार्ड में भर्ती एक मरीज ने अस्पताल की चौथी मंजिल की खिड़की से छलांग लगाने का प्रयास किया, लेकिन उसी वार्ड में भर्ती एक अन्य मरीज की सूझबूझ और साहसिक प्रयास से उसकी जान बच गई।

दरअसल, धालभूमगढ़ प्रखंड के ऊपरसोली गांव निवासी 52 वर्षीय सुफल सिंह 17 जून से सर्दी, बुखार और शरीर में खिंचाव की शिकायत के कारण एमजीएम अस्पताल में इलाजरत थे। शुक्रवार शाम उन्हें मेडिसिन वार्ड पार्ट-टू के बेड संख्या 451 पर भर्ती किया गया । रात के समय उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति अचानक असामान्य प्रतीत होने लगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुफल सिंह वार्ड की खिड़की तक पहुंच गए और बाहर छलांग लगाने का प्रयास करने लगे। उन्होंने अपने शरीर का बड़ा हिस्सा खिड़की के बाहर निकाल लिया था, जिससे वार्ड में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों के बीच हड़कंप मच गया। स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था।

इसी दौरान बेड संख्या 453 पर भर्ती बर्मामाइंस निवासी बलबीर पांडे की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना किसी हिचकिचाहट के दौड़कर सुफल सिंह को पकड़ लिया। काफी मशक्कत और साहस का परिचय देते हुए उन्होंने उन्हें सुरक्षित वार्ड के अंदर खींच लिया। खिड़की के बाहर बने छज्जे ने भी इस बचाव कार्य में मदद की, जिसके कारण एक संभावित दुर्घटना टल गई।

घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल के सुरक्षा कर्मी, नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सक मौके पर पहुंचे। मरीज की स्थिति का आकलन किया गया और उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। अस्पताल प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाए।

परिजनों ने बताया कि सुफल सिंह पिछले दो दिनों से तेज बुखार से पीड़ित थे। बीमारी के कारण उन्होंने पर्याप्त भोजन भी नहीं किया था, जिससे उनकी शारीरिक कमजोरी बढ़ गई थी। लगातार खराब स्वास्थ्य के कारण वे मानसिक रूप से भी परेशान और अस्थिर दिखाई दे रहे थे।

घटना के बाद चिकित्सकों ने मरीज की विस्तृत जांच की। स्थिति सामान्य होने पर और परिजनों की सहमति के आधार पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, समय रहते साहस और सतर्कता का परिचय देकर मरीज की जान बचाने वाले बलबीर पांडे की अस्पताल कर्मियों, मरीजों और परिजनों ने जमकर सराहना की। उनकी तत्परता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और एक व्यक्ति की जान बच सकी।

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