रांची: झारखंड की कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय ‘खरीफ कर्मशाला 2026’ के समापन अवसर पर अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों के उत्थान को लेकर बेहद गंभीर है और इस कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कर्मशाला में कृषि प्रभाग के निदेशकों की अनुपस्थिति पर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई।
कम बारिश की आशंका: सूखे से निपटने के लिए बना ‘एक्शन प्लान’
भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा इस वर्ष कम बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए कृषि मंत्री ने पहले ही तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए समय सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए सही समय पर बीज और सिंचाई सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है।
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कांटिजेंट प्लान: सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों के लिए सूखे से निपटने हेतु एक विशेष कार्ययोजना (Contingent Plan) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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अधिकारियों को निर्देश: मंत्री ने कहा, “आप लोग एक सेना के रूप में किसानों के लिए काम करेंगे। जिला कृषि पदाधिकारी जिलों में नोडल अधिकारी के रूप में मोर्चा संभालेंगे।”
तय हुई समय सीमा: 15 से 22 मई तक के बड़े कार्यक्रम
कृषि मंत्री ने राज्य भर में कृषि गतिविधियों को तेज करने के लिए एक सख्त समय-सारणी (Timeline) जारी की है:
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15 मई: जिला स्तरीय बैठकें होंगी, जिसमें प्रखंड स्तर के अधिकारी भी शामिल होंगे और प्लान साझा करेंगे।
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20 मई: हर जिले में ‘खरीफ मेला’ आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक प्रखंड से कम से कम 500 प्रगतिशील किसान हिस्सा लेंगे। यहाँ सॉइल टेस्टिंग (मिट्टी जांच) की सुविधा भी मिलेगी।
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22 मई: प्रखंड स्तर पर मेलों का आयोजन होगा, जहाँ हर पंचायत से 50-50 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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बीज वितरण: एसएचजी (SHG) और एफपीओ (FPO) के माध्यम से बीजों का वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सिर्फ खेती ही नहीं, अन्य प्रभागों पर भी सख्ती
कृषि के अलावा अन्य संबद्ध विभागों को भी मंत्री ने समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है:
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मत्स्य पालन: मई अंत तक मत्स्य बीजों का वितरण अनिवार्य रूप से हो जाना चाहिए।
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पशुपालन: पशुओं की दवाइयों की निविदा और वितरण समय पर सुनिश्चित करें।
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जल संरक्षण: मई के अंत तक तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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अन्य योजनाएं: सोलर पंप वितरण, ड्रिप इरीगेशन (टपक सिंचाई) और मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों के सख्त अनुपालन की बात कही गई।
वैज्ञानिकों ने दी ‘उन्नत खेती’ की सलाह
कर्मशाला के दूसरे दिन कृषि वैज्ञानिकों ने तकनीकी जानकारी साझा की। डॉ. अखलाक अहमद और डॉ. अशोक कुमार सिंह ने धान की उन्नत किस्मों के चयन और वैज्ञानिक तरीके से बुआई पर जोर दिया। डॉ. अरुण कुमार ने मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती और सॉइल कंजर्वेशन के उपायों की जानकारी दी। इस अवसर पर सूखे से निपटने की तैयारियों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
विशेष सचिव श्री गोपाल जी तिवारी ने बताया कि इस कर्मशाला का मुख्य उद्देश्य जिला स्तर पर एक ‘इंटीग्रेटेड प्लान’ तैयार करना था ताकि सूखे जैसी आपात स्थिति में किसानों को तत्काल राहत दी जा सके।

