रांची। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का आंदोलन 20वें दिन भी जारी है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद अपनी प्रमुख मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि सरकार ने कुछ मांगों को स्वीकार किया है, लेकिन जब तक टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग पर निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी बीच ईटीवी भारत ने आंदोलन की कोर कमेटी से जुड़े पीयूष कुमार और रविंद्र पासवान से बातचीत कर आंदोलन की रणनीति, परीक्षा रद्द करने की मांग, राजनीतिक हस्तक्षेप और सरकार से संवाद समेत विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बात की।
छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14वीं जेपीएससी पीटी, 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की है। अब सरकार को एक कदम और आगे बढ़ते हुए टीडीपीएल द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं पर भी निर्णय लेना चाहिए। छात्रों ने 11वीं-13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र पदाधिकारी, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, सीडीपीओ, सिविल जज भर्ती, झारखंड पात्रता परीक्षा, सहायक लोक अभियोजक की नियमित एवं बैकलॉग परीक्षाओं और जेएसएससी-सीजीएल समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की है।
पीयूष ने दावा किया कि इन परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठे हैं और सरकारी जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली ही दूषित हो गई है तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सभी अभ्यर्थियों को फर्जी नहीं कहा जा सकता, लेकिन यदि परीक्षा प्रक्रिया में एक भी फर्जी अभ्यर्थी या गंभीर अनियमितता सामने आती है तो निष्पक्षता और न्याय के लिए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है।
सरकार के वैधानिक तर्क पर छात्रों की अलग राय
परीक्षाएं रद्द करने की मांग पर सरकार के वैधानिक तर्क का जिक्र किए जाने पर पीयूष ने कहा कि सरकार अपनी जांच में गड़बड़ी की स्थिति देख रही है। उनके अनुसार, यदि नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंची है तो उसमें हस्तक्षेप संभव है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए है।
विधानसभा घेराव में हिंसक स्थिति पर छात्रों ने जताया खेद
10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान भीड़ के अनियंत्रित होने और पुलिस लाठीचार्ज को लेकर रविंद्र पासवान ने कहा कि उस दिन बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे और उनमें आक्रोश था। उन्होंने माना कि अंत में कुछ गड़बड़ी हुई, लेकिन उनके अनुसार लाठीचार्ज की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि मंच ने खुद उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
भाजपा पर आंदोलन हाईजैक करने के आरोप को बताया गलत
छात्र आंदोलन के भाजपा द्वारा हाईजैक किए जाने के आरोप पर रविंद्र पासवान ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही आंदोलन को अपने राजनीतिक हित से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विधानसभा घेराव में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे तो बार-बार आंदोलन को भाजपा से जोड़ने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और मंच का उद्देश्य राजनीतिक दल से जुड़ना नहीं है।
दो मंच को लेकर भी दी सफाई
आंदोलन स्थल पर दो मंच बनाए जाने के सवाल पर रविंद्र पासवान ने कहा कि अलग मंच बनाने का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि उनका समूह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। उन्होंने बताया कि रिफॉर्म मंच से राहुल गांधी ने भी बातचीत कर आंदोलन का समर्थन किया था। साथ ही सीजेपी के अभिजीत दीपके ने फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि दूसरे मंच से जुड़े छात्र भी छात्रहित में आवाज उठा रहे हैं और वे उसका सम्मान करते हैं।
टीडीपीएल की परीक्षाओं पर छात्रों को भरोसा नहीं
रविंद्र पासवान ने टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने 11वीं-13वीं जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा कि जब परीक्षा से जुड़े मामलों में सवाल उठ चुके हैं तो उसी एजेंसी द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने जेएसएससी-सीजीएल मामले का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन अब वे राज्य की जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।
रविंद्र ने कहा कि सीआईडी की जांच में प्रश्नपत्र से जुड़े कथित मामले सामने आने के बाद छात्रों का भरोसा और कमजोर हुआ है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए सीबीआई को जांच सौंपी जानी चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस से पहले सीएम से संवाद की अपील
आंदोलन कब तक चलेगा, इस सवाल पर रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्र आंदोलन को लंबा खींचना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस नजदीक है और उस दिन छात्रों का सड़क पर रहना अच्छा संदेश नहीं देगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आंदोलनरत छात्रों के साथ सीधे संवाद करने की अपील की।
पीयूष कुमार ने भी कहा कि अब छात्रों की बातचीत सरकार की समिति के बजाय सीधे मुख्यमंत्री से होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री को छात्रों का अभिभावक बताते हुए कहा कि उनसे बातचीत करना किसी तरह की हठधर्मिता नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र तकलीफ में हैं और अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखना चाहते हैं।
छात्रों ने कहा- आंदोलन कमजोर करने की कोशिश हो रही
पीयूष ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार यदि यह कहती है कि छात्रों की मांगों की सूची लंबी है तो उसे यह भी समझना चाहिए कि इतनी लंबी सूची बनने की वजह क्या है। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा कि जिन मामलों में सवाल उठ रहे हैं, उनकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी छात्र बारी-बारी से टीम बनाकर प्रदर्शन स्थल की व्यवस्था संभाल रहे हैं। छात्राओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन की ओर से साफ-सफाई की व्यवस्था किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
सीएम से बोले छात्र नेता- हमारे दर्द को समझिए
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील के सवाल पर पीयूष कुमार भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री छात्रों के दर्द को समझें और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करें। उन्होंने मुख्यमंत्री से एक बार आंदोलनकारी छात्रों के साथ बैठकर संवाद करने की अपील की।
पीयूष ने कहा कि छात्र चाहते हैं कि उनकी समस्याओं को सीधे मुख्यमंत्री सुने। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी होती हैं तो छात्र आंदोलन छोड़कर अपनी पढ़ाई, लाइब्रेरी और अपने काम पर लौटना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि छात्रों से संवाद कर उनकी परेशानी को समझें और समाधान का रास्ता निकालें।
