पटना। बिहार को देश के अग्रणी अंतर्देशीय मत्स्य पालन राज्यों में शामिल करने के लिए राज्य सरकार ने ‘विजन 2030-बिहार मत्स्य प्राथमिकता परियोजना’ पर काम तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ मत्स्यजीवी परिवारों की आय में वृद्धि, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और पूरी मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विजन 2030’ बिहार को अग्रणी अंतर्देशीय मत्स्य राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण गति देगा। उन्होंने अधिकारियों से उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आधुनिक तकनीक के साथ वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा देने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के साथ इससे जुड़े परिवारों की आय भी लगातार बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
सम्राट चौधरी ने मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को और अधिक सक्षम बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने समितियों के कौशल विकास, तकनीकी क्षमता बढ़ाने, बेहतर प्रबंधन और उत्पादन वृद्धि के लिए जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि समितियों को मजबूत करने से मत्स्यजीवी परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और राज्य के कुल राजस्व में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि बिहार में मत्स्य क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना जरूरी है। ‘विजन 2030’ के माध्यम से मत्स्य पालन को किसानों और मत्स्यजीवियों की आय बढ़ाने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने का प्रभावी माध्यम बनाया जाएगा।
आठ प्राथमिकता परियोजनाओं से 50,200 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य
बैठक में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ‘विजन 2030’ का रोडमैप सामने रखा। इसके तहत सतत विकास और मूल्यवर्धन के जरिए बिहार के मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने की योजना है। आठ प्राथमिकता परियोजनाओं के माध्यम से 1,848.75 हेक्टेयर के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप क्षेत्र और 9,357 हेक्टेयर के परियोजना प्रभाव क्षेत्र को विकसित करने का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं से 50,200 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता लेने का प्रस्ताव है। इससे उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, विपणन और रोजगार सृजन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अलग-अलग जिलों में विकसित होंगे विशेष मत्स्य क्लस्टर
क्षेत्रीय संभावनाओं के आधार पर राज्य के विभिन्न जिलों में विशेष मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इसके तहत सीवान आर्द्रभूमि क्लस्टर के समग्र विकास, सारण स्कैंपी क्लस्टर में मीठे पानी के बड़े झींगे के उत्पादन और मुंगेर केज क्लस्टर में केज कल्चर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा मिथिला आर्द्रभूमि क्लस्टर के तहत खासकर मधुबनी क्षेत्र में आर्द्रभूमि आधारित मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। मोतिहारी मत्स्य समग्र क्लस्टर के विकास को भी प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक में मत्स्य उत्पादन में चरणबद्ध वृद्धि के साथ रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने तथा ब्लू इकॉनमी को गति देने पर विशेष जोर दिया गया।
