पिथौरागढ़/धारचूला। कोविड-19 महामारी के कारण करीब छह वर्षों से बंद भारत-चीन सीमा व्यापार शनिवार को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के ऐतिहासिक लिपूलेख दर्रे के रास्ते फिर शुरू हो गया। वर्ष 2026 के सीमा व्यापार की शुरुआत के साथ भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के तकलाकोट पहुंच गया है।
20 सदस्यीय भारतीय दल ने पूरी की प्रक्रिया
भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारी और चार सहायक सहित कुल 20 सदस्य लिपूलेख दर्रे के रास्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश कर तकलाकोट मंडी पहुंचे।
उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी के अनुसार, 31 जुलाई की शाम व्यापारिक दल ने गुंजी स्थित आव्रजन कार्यालय में सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद दल ने नाबीढांग में रात्रि विश्राम किया।
शनिवार सुबह करीब 10:15 बजे चीन के अधिकारियों की जांच और अनुमति मिलने के बाद भारतीय दल ने सीमा पार की और तकलाकोट पहुंचकर व्यापारिक गतिविधियां शुरू कीं।
पहले से पंजीकृत व्यापारियों को ही मिली अनुमति
प्रशासन के अनुसार, चीन के निर्देशों के तहत फिलहाल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश दिया गया है, जो पहले से पंजीकृत हैं और पूर्व में सीमा व्यापार कर चुके हैं। इसी कारण पहले दल के व्यापारी भारत से नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गए हैं।
व्यापारी तकलाकोट में पहले से उपलब्ध अपने सामान और निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर व्यापार करेंगे। प्रशासन ने बताया कि आने वाले व्यापारिक दलों के लिए चीन प्रशासन के साथ ई-मेल के माध्यम से लगातार समन्वय किया जा रहा है। अनुमति मिलने के बाद अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट भेजा जाएगा।
