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Monday, June 15, 2026

देश में पेट्रोल, डीजल और कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक, एलपीजी की सप्लाई स्थिर: सरकार

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोमवार को देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य और स्थिर बनी हुई है। देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

रिटेल आउटलेट्स पर बढ़ी बिक्री: बल्क खरीदार हुए शिफ्ट

नई दिल्ली में आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) पर ईंधन की बिक्री में असामान्य तेजी देखी जा रही है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है।

  • बिक्री बढ़ने का कारण: औद्योगिक, व्यावसायिक (कमर्शियल) और संस्थागत खरीदार जो पहले थोक (बल्क) में ईंधन खरीदते थे, वे अब रिटेल आउटलेट्स से खरीदारी कर रहे हैं।

  • बड़ा बदलाव: अकेले मई महीने में लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल की बिक्री बल्क मार्केट से रिटेल आउटलेट्स पर शिफ्ट हो गई, जिससे स्थानीय स्तर पर मांग बढ़ी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरा भारतीय एलएनजी जहाज ‘दिशा’

पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने इस संकट के बीच एक बड़ी और राहत भरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि:

  • सुरक्षित मार्ग: भारत का एलएनजी कैरियर जहाज ‘दिशा’, जो 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी कार्गो लेकर आ रहा है, वह पश्चिम एशिया के तनावग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बेहद सुरक्षित तरीके से गुजर चुका है।

  • पहुंचने की तिथि: इस जहाज के 18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंचने की पूरी उम्मीद है।

  • नाविकों की सुरक्षा: मंत्रालय इस समुद्री मार्ग पर तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा और मदद के लिए विदेश मंत्रालय, अंतरराष्ट्रीय मिशनों और शिपिंग कंपनियों के साथ लगातार चौबीसों घंटे तालमेल बिठाए हुए है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच शांति की उम्मीद: 19 जून को समझौता

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बीते 28 फरवरी से जारी भीषण युद्ध और तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच आज एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर आम सहमति बन गई है। इस महत्वपूर्ण शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे वैश्विक तेल बाजार और आपूर्ति श्रृंखला को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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