नई दिल्ली । कांग्रेस ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले के दौरान तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इसके साथ ही पार्टी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर कड़े सवाल उठाते हुए वैश्विक मंच पर भारत के रुख को बेहद कमजोर, आत्मसमर्पण करने वाला और निराशाजनक करार दिया है।
युद्ध से भारत का लेना-देना नहीं, फिर भी मारे गए बेगुनाह भारतीय
कांग्रेस की सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटना की विस्तृत जानकारी दी।
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घटना और पीड़ित: 11 जून को ओमान की खाड़ी में ‘एमटी सेटेबेलो’ (MT Settebello) नामक जहाज पर अमेरिकी हमला हुआ था। इस हमले में भारत के तीन होनहार नाविकों की जान चली गई।
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मृतकों की पहचान: मारे गए नाविकों में आदित्य शर्मा (हिमाचल प्रदेश), शिवानंद चौरसिया (उत्तर प्रदेश) और पटनाला सुरेश (आंध्र प्रदेश) शामिल हैं।
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कांग्रेस का तर्क: सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि इस क्षेत्र में जारी युद्ध या भू-राजनीतिक टकराव से भारत का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, इसके बावजूद हमारे बेगुनाह नागरिक अकारण ही इस हिंसक टकराव की बलि चढ़ रहे हैं।
पीएम मोदी की आगामी यात्रा और डोनाल्ड ट्रंप से जवाब की मांग
कांग्रेस ने इस मुद्दे को सीधे प्रधानमंत्री की आगामी विदेश नीति और उनके कूटनीतिक संबंधों से जोड़ा है। श्रीनेत ने सीधा सवाल दागते हुए पूछा कि:
“जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आगामी विदेश यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे, तो क्या वे इस बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को उनके सामने मजबूती से उठाएंगे? क्या भारत सरकार अपने नागरिकों पर हुए इस कायरतापूर्ण हमले के लिए अमेरिका से जवाब मांगेगी?”
विदेश मंत्रालय की कार्रवाई ‘औपचारिक और नाकाफी’
पार्टी ने विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा उठाए गए राजनयिक कदमों को महज एक दिखावा और औपचारिक कवायद बताया।
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दबी जुबान में आपत्ति: कांग्रेस का आरोप है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत में तैनात अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब तो किया, लेकिन केवल ‘दबी जुबान’ में अपनी आपत्ति दर्ज कराई, जो कि देश की संप्रभुता के लिहाज से नाकाफी है।
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अमेरिका का अड़ियल रुख: श्रीनेत ने कहा कि इस घटना पर माफी मांगने या शोक जताने के बजाय, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इस हिंसक कार्रवाई को ‘जायज’ ठहराया है। सबसे खेदजनक बात यह है कि भारत सरकार ने अमेरिकी विदेश सचिव के इस बयान का अब तक कोई कड़ा खंडन नहीं किया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के दौरे का विरोध
कांग्रेस ने सरकार के रवैये को संप्रभुता के साथ समझौता करने जैसा बताया है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि आगामी व्यापार समझौते (Trade Agreement) को अंतिम रूप देने के लिए भारत आ रहे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के दौरे का अब कोई औचित्य नहीं रह जाता है। अमेरिका ने हमारे नागरिकों की जान ली है और खेद जताने के बजाय वह देश को लगातार अपमानित कर रहा है, ऐसे में इस समझौते पर आगे बढ़ना भारत की संप्रभुता का अपमान होगा।
