हाल ही में यह सामने आया है कि भारत ऐसे हाल में आ सकता है जहाँ वह चीन को “End-User प्रमाणपत्र” देने पर सहमति दे सकता है, ताकि चीन से दुर्लभ पृथ्वी (rare earth) संसाधन आयात किए जा सकें। इस प्रकार का प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करता है कि चीन द्वारा दिए गए संसाधन पुनः अमेरिका या अन्य देशों को न जाएँ।
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का सम्मान करता है और जहां आवश्यक हो, End-User प्रमाणपत्रों का पालन करता है।
चीन की ओर से यह मांग की गई है कि भारत द्वारा प्राप्त heavy rare earth magnets का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों के लिए हो और उन्हें पुनः न बेचा जाए।
पिछले कुछ समय से चीन ने अपनी rare earths निर्यात नियंत्रण नीति कड़ी कर दी है, विशेषकर प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में उपयोग के लिए।
भारत इस पर भी विचार कर रहा है कि कैसे अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाकर निर्भरता कम की जाए। राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन को इस दिशा में एक कदम माना जा रहा है।


