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Wednesday, August 26, 2026

अमित शाह का बड़ा बयान, कहा- भारत कोई धर्मशाला नहीं, सिर्फ नागरिकों को रहने का अधिकार

नई दिल्ली। अवैध घुसपैठ के खिलाफ केंद्र सरकार के सख्त रुख को दोहराते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को है। मंगलवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सरकार देश को घुसपैठियों से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अवैध घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और देश के जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बताया।

अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ केवल सीमा प्रबंधन से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संरचना पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ अवैध घुसपैठ और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी उभरती चुनौतियों की समय रहते पहचान करना और उनसे निपटना जरूरी है।

गृह मंत्री ने बताया कि पिछले आठ महीनों में जमीनी सीमा साझा करने वाले सभी राज्यों का दौरा किया गया है। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चार-सूत्रीय रणनीति वाला एक दस्तावेज भी राज्य सरकारों के साथ साझा किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है।

मजबूत आंतरिक सुरक्षा विकसित भारत की पहली जरूरत

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को हर क्षेत्र में अग्रणी बनना है तो देश की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।

उन्होंने कहा कि देश ने आंतरिक सुरक्षा के तीन प्रमुख संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी चुनौतियों पर काबू पाया है। इसके लिए उन्होंने सभी राज्यों के पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के योगदान को श्रेय दिया।

शाह ने कहा कि यदि पिछली सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर से जुड़ी समस्याओं के गंभीर रूप लेने से पहले ही उनकी पहचान कर समाधान किया होता तो देश को दशकों तक इन चुनौतियों से नहीं जूझना पड़ता। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से भविष्य की चुनौतियों को लेकर पहले से तैयारी करने का आह्वान किया।

15 से 20 साल आगे की चुनौतियों पर नजर रखने की जरूरत

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में शाह ने अधिकारियों से अगले 15 से 20 वर्षों के संभावित रुझानों और चुनौतियों का आकलन करने को कहा। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा और संसाधनों की असुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, बढ़ती कट्टरपंथ की समस्या, साइबर हमलों और गलत सूचना फैलाने वाले अभियानों से पैदा होने वाले खतरों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा चुनौतियां गंभीर संकट का रूप लेने से पहले उनकी पहचान कर प्रभावी रणनीति तैयार करना जरूरी है। इसके लिए केंद्र और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जाना चाहिए।

इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग पर जोर

गृह मंत्री ने इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि एक एकीकृत डेटा इकोसिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम, नैटग्रिड और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को आपस में जोड़ा गया है।

उन्होंने युवा पुलिस अधिकारियों से डेटा को एकीकृत और विश्लेषित करने, अपराधियों के तौर-तरीकों की पहचान करने तथा कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करने का आह्वान किया।

2019 से 2026 के बीच 274 भगोड़े विदेश से लाए गए

अमित शाह ने कहा कि सरकार ने विदेश में मौजूद भगोड़ों को भारतीय कानून के दायरे में लाने के लिए व्यवस्था को मजबूत किया है। उनके अनुसार 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से भारत वापस लाया गया है। उन्होंने सभी राज्यों से भी इसी उद्देश्य के साथ काम करने का आह्वान किया।

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार की रणनीति खतरों के बड़े संकट में बदलने से पहले उनकी पहचान कर शुरुआती चरण में ही उनसे निपटने की है। उन्होंने कहा कि इसी तरह का सुरक्षा तंत्र तैयार करके सुरक्षित, घुसपैठ-मुक्त और नशीले पदार्थों से मुक्त भारत का निर्माण किया जा सकता है।

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