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Sunday, August 16, 2026

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने फहराया तिरंगा, गिनाईं झारखंड पुलिस की उपलब्धियां

रांची। झारखंड पुलिस मुख्यालय में शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों को देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता और गौरव की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प दिलाया। डीजीपी ने साइबर अपराध, नशाखोरी, संगठित अपराध और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के साथ आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने तथा संविधान और कानून के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में डीजीपी ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नक्सलवाद के खिलाफ अभियान, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई, साइबर अपराध नियंत्रण, पुलिस आधुनिकीकरण और पुलिसकर्मियों के कल्याण के क्षेत्र में झारखंड पुलिस की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुलिस बल प्रतिबद्धता, साहस और पेशेवर रणनीति के साथ राज्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में बड़ी कामयाबी

डीजीपी ने कहा कि झारखंड पुलिस के जवानों के अदम्य साहस, बलिदान और लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण राज्य में नक्सलवाद की चुनौती काफी कमजोर हुई है। जनवरी से 5 अगस्त 2026 तक 103 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा भी शामिल हैं। इसी अवधि में 46 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि पुलिस के साथ मुठभेड़ में 22 नक्सली मारे गए। इनमें झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये के इनामी केंद्रीय कमेटी सदस्य अनल उर्फ पतिराम मांझी भी शामिल था।

उन्होंने बताया कि नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान पुलिस ने 98 हथियार, 7,470 कारतूस, 11 किलोग्राम विस्फोटक, तीन आईईडी और करीब छह लाख रुपये की लेवी बरामद की। इन कार्रवाइयों से नक्सली संगठनों के हथियारों की आपूर्ति और आर्थिक नेटवर्क को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है।

संगठित अपराध और नशा तस्करी पर कार्रवाई

डीजीपी ने कहा कि संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ झारखंड पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत लगातार कार्रवाई कर रही है। जनवरी से जुलाई 2026 तक संगठित अपराध से जुड़े 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 63 हथियार और 274 गोलियां बरामद हुईं। वहीं गिरोहों से जुड़े 50 अपराधियों के खिलाफ सीसीए के तहत कार्रवाई की गई।

उन्होंने कहा कि आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए खुफिया तंत्र, आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का इस्तेमाल किया जा रहा है। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ भी अभियान तेज किया गया है। जनवरी से जून 2026 तक नशीले पदार्थों के अवैध इस्तेमाल और कारोबार से जुड़े 710 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। डीजीपी ने कहा कि कार्रवाई के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

साइबर अपराध के खिलाफ विशेष अभियान

डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराध को झारखंड पुलिस ने बड़ी चुनौती के रूप में लिया है। डीजीपी ने बताया कि जनवरी से जून 2026 तक साइबर अपराध में संलिप्त 486 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 17 लाख रुपये से अधिक की राशि समेत कई अवैध वस्तुएं बरामद की गईं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध पीड़ितों से ठगी गई रकम वापस उनके खातों में पहुंचाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष अभियानों के माध्यम से कई साइबर गिरोहों का पर्दाफाश किया गया है।

पुलिस आधुनिकीकरण से मजबूत हुई व्यवस्था

पुलिस आधुनिकीकरण के तहत झारखंड पुलिस को बड़ी संख्या में नए वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। 13 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आधुनिक पुलिस वाहनों का लोकार्पण किया था। इसके तहत पुलिस को 636 चार पहिया और 849 दोपहिया वाहन मिले। डीजीपी ने कहा कि नए वाहनों से कानून-व्यवस्था, त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया और आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है।

ईआरएसएस और डायल-112 की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जनवरी में करीब 16 हजार शिकायतें दर्ज हुई थीं और पुलिस का औसत प्रतिक्रिया समय 9 मिनट 41 सेकंड था। जुलाई में शिकायतों की संख्या बढ़कर करीब 23 हजार हो गई, लेकिन औसत प्रतिक्रिया समय घटकर 9 मिनट 12 सेकंड रह गया। डीजीपी ने कहा कि शिकायतों में वृद्धि के बावजूद पुलिस ने घटनास्थल तक पहुंचने के औसत समय में सुधार किया है।

पुलिसकर्मियों के कल्याण पर भी जोर

डीजीपी ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए किए जा रहे कल्याणकारी कार्यों की जानकारी भी दी। जनवरी से जुलाई 2026 तक झारखंड पुलिस सहायता एवं कल्याण कोष से 1,007 लाभार्थियों को 3.69 करोड़ रुपये, चतुर्थवर्गीय कर्मचारी कल्याण कोष से 42 लाभार्थियों को 11.99 लाख रुपये और झारखंड पुलिस शिक्षा कोष से 9,443 लाभार्थियों को 11.46 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।

झारखंड पुलिस परोपकारी कोष से पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के 737 आश्रितों की सहायता के लिए करीब 3.93 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। वहीं 153 पुलिसकर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई है। 4 अगस्त को हुई पुलिस मुख्यालय स्तरीय अनुकंपा समिति की बैठक में 84 मामलों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए योग्य पाया गया।

पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए वीरता पदक प्राप्त 37 पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया है। इसके अलावा वायरलेस संवर्ग के 11 पुलिस अवर निरीक्षकों को पुलिस निरीक्षक तथा तीन सहायक पुलिस अवर निरीक्षकों को पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी गई।

आयुधिक संवर्ग में 10 आयुधिक अवर निरीक्षकों को आयुधिक निरीक्षक और 24 हवलदारों को आयुधिक अवर निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति दी गई। झारखंड सशस्त्र पुलिस के 201 हवलदारों को सहायक अवर निरीक्षक की कोटि में प्रोन्नति दी गई। वहीं 970 पुलिस पदाधिकारियों के एसीपी-एमएसीपी को स्वीकृति दी गई।

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