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Tuesday, August 11, 2026

पीएमओएस में लगातार खर्राटे लेना हो सकता है स्लीप एपनिया का संकेत

पीएमओएस (पहले पीसीओएस) केवल अनियमित पीरियड्स, मुंहासे या वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है। हाल के शोध बताते हैं कि इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में नींद संबंधी विकार, विशेष रूप से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए), सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक पाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार खर्राटे आना, रात में सांस रुकना, बार-बार नींद खुलना और सुबह उठने पर भी थकान महसूस होना ऐसे लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पीएमओएस और नींद का संबंध

पीएमओएस में एंड्रोजन हार्मोन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और वजन में बदलाव जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं, जो नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं में अनिद्रा, दिनभर नींद आना और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है।

स्लीप एपनिया क्यों है गंभीर

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं और सांस लेने का मार्ग बार-बार अवरुद्ध हो जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और लंबे समय में उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और टाइप-2 मधुमेह का जोखिम बढ़ सकता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

  • तेज खर्राटे आना
  • रात में सांस रुकना
  • घुटन महसूस कर नींद खुलना
  • सुबह सिरदर्द होना
  • दिनभर अत्यधिक थकान
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • चिड़चिड़ापन या मूड में बदलाव

हार्मोन और वजन पर भी पड़ता है असर

खराब नींद इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकती है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रण प्रभावित होता है। इसके अलावा कोर्टिसोल बढ़ने से तनाव, सूजन और वजन बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। नींद की कमी भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन लेप्टिन और घ्रेलिन के संतुलन को भी बिगाड़ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि पीएमओएस के साथ लगातार खर्राटे, अत्यधिक थकान या सांस रुकने जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यकता पड़ने पर स्लीप स्टडी कराना उचित है। समय पर जांच और उपचार से नींद, हार्मोनल संतुलन और मेटाबोलिक स्वास्थ्य में सुधार संभव है।

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