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Saturday, August 8, 2026

यूपीआई लेनदेन उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए मुफ्त रहेगा

नई दिल्ली। भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई) ने स्पष्ट किया है कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बावजूद आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) से लेनदेन मुफ्त रहेगा।

लोकसभा में कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के एक दिन बाद पीसीआई ने यह स्पष्टीकरण दिया। विधेयक में सरकार को यूपीआई समेत अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।

पीसीआई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि 2016 में शुरुआत के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी बिना किसी लेनदेन शुल्क के डिजिटल भुगतान की सुविधा जारी रहेगी। परिषद ने स्पष्ट किया कि किराना दुकानों समेत छोटे व्यापारियों को यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क नहीं देना होगा।

परिषद के अनुसार, भविष्य में यदि बड़े कारोबारियों पर मर्चेंट सेवा शुल्क लगाया जाता है, तब भी उपभोक्ताओं से यूपीआई के इस्तेमाल के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। जहां लागू हो, एमडीआर शुल्क व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाता के बीच व्यावसायिक व्यवस्था का हिस्सा होता है और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी विधेयक पारित होने के बाद स्पष्ट किया था कि एमडीआर केवल कारोबारियों पर लागू होता है और इसका ग्राहकों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा था कि इससे प्राप्त राशि का इस्तेमाल बैंक और वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियां भुगतान ढांचे और सुरक्षा को मजबूत करने में करती हैं।

वित्त मंत्री ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उस दावे को भी खारिज किया था, जिसमें आम लोगों पर यूपीआई इस्तेमाल का बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई थी। पीसीआई ने भी पुष्टि की है कि यूपीआई सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त बनी रहेंगी।

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