काठमांडू। नेपाल सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय वेलनेस पर्यटन रणनीति 2026–2035 और पांच वर्षीय रणनीतिक कार्ययोजना 2026–2030 सार्वजनिक की है। संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय की इस रणनीति का लक्ष्य नेपाल को बहुआयामी वेलनेस पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना है।
रणनीति के तहत देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों की विशेषताओं के आधार पर विशिष्ट वेलनेस केंद्र विकसित किए जाएंगे। काठमांडू को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकीकरण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां विरासत आधारित योग केंद्र, बौद्ध ध्यान केंद्र और पारंपरिक स्पा सेवाओं को एकीकृत रूप में उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।
मंत्रालय के अनुसार, नेपाल प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता, आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक उपचार पद्धतियों का अनूठा संगम है। इन्हीं विशेषताओं के आधार पर वेलनेस पर्यटन के जरिए टिकाऊ आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
नई रणनीति में वेलनेस सेवाओं को एकीकृत करने, आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा विकसित करने, सेवाओं का प्रमाणीकरण करने और दक्ष जनशक्ति तैयार करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण वेलनेस सेवाएं उपलब्ध कराने वाले प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से नेपाल प्राचीन काल से ही ऋषियों, योगियों, साधकों और औषधीय जड़ी-बूटियां एकत्र करने वालों की साधना भूमि रहा है। हिमालय का वातावरण, स्थानीय औषधीय वनस्पतियां तथा बौद्ध और हिंदू दर्शन पर आधारित साधना पद्धतियां नेपाल को मानसिक शांति और शारीरिक पुनर्जीवन के लिए विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं।
सरकार ने पर्यटन क्षेत्र की मौसमी निर्भरता कम करने के साथ पर्यटकों के ठहरने की अवधि और खर्च बढ़ाने के लिए वेलनेस पर्यटन को प्रमुख रणनीतिक माध्यम माना है।
पर्यटकों के लिए कई नए वेलनेस उत्पाद विकसित करने की योजना है। बहुदिवसीय ट्रेकिंग के साथ योग और ध्यान को जोड़कर ‘वेलनेस ट्रेकिंग सर्किट’ बनाया जाएगा। बौद्ध विहारों में आवासीय कार्यक्रमों के माध्यम से बौद्ध दर्शन और सजगता का अभ्यास कराने के लिए ‘मठ ध्यान विश्राम’ की अवधारणा भी प्रस्तावित की गई है।
नेपाल की स्थानीय हिमालयी जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित 7 से 14 दिन के ‘पंचकर्म विषहरण विश्राम’ भी विकसित किए जाएंगे। इसके जरिए नेपाल को किफायती और गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उपचार एवं वेलनेस केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना है।
रणनीति में नेपाली पारंपरिक गायन कटोरा, रेकी तथा आदिवासी झांकरी परंपरा से जुड़ी पद्धतियों पर आधारित ‘ध्वनि एवं ऊर्जा उपचार’ जैसे अनुभवों को भी व्यवस्थित रूप से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने की योजना है। सरकार इन पारंपरिक पद्धतियों को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से विकसित कर वेलनेस पर्यटन के नए उत्पाद के रूप में स्थापित करना चाहती है।
मौसम के अनुसार भी अलग-अलग वेलनेस कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। वर्षा ऋतु में विषहरण कार्यक्रम, सर्दियों में ताप एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले कार्यक्रम, वसंत में नवीकरण और पुनर्जीवन कार्यक्रम तथा शरद ऋतु में कृतज्ञता केंद्रित वेलनेस कार्यक्रम संचालित करने का प्रस्ताव है।
सरकार का मानना है कि इस रणनीति से नेपाल का पर्यटन केवल पर्वतारोहण, ट्रेकिंग और पारंपरिक सांस्कृतिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि योग, ध्यान, आयुर्वेद, प्राकृतिक उपचार और आध्यात्मिक अनुभवों से भी जुड़ेगा। इससे नेपाल को सालभर पर्यटकों को आकर्षित करने वाले बहुआयामी वेलनेस पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
