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Wednesday, August 5, 2026

राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय ‘नारी शक्ति’ का जलवा, 13 में से 8 स्वर्ण महिलाओं ने जीते

नई दिल्ली। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के शानदार प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकत महिला खिलाड़ी बनकर उभरी हैं। भारतीय दल के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से आठ स्वर्ण महिला खिलाड़ियों ने जीतकर इतिहास रच दिया। भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जूडो और पैरा एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने साबित किया कि भारतीय खेलों में अब ‘नारी शक्ति’ सफलता की नई पहचान बन चुकी है।

भारोत्तोलन में ओलंपिक चैंपियन मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी बादशाहत कायम रखी। पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला धनखड़ ने गोला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण अपने नाम किया, जबकि अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।

मुक्केबाजी में भारतीय महिला खिलाड़ियों का दबदबा सबसे अधिक देखने को मिला। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैसमीन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय महिला मुक्केबाजी की ताकत का परिचय दिया।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर गर्व जताते हुए कहा कि 13 में से आठ स्वर्ण महिलाओं के नाम होना पूरे देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे खिलाड़ियों, उनके परिवारों, कोचों और सहयोगी स्टाफ की वर्षों की मेहनत और समर्पण है। साथ ही यह सफलता देश की लाखों बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देगी।

भारतीय ओलंपिक संघ के अनुसार, ग्लासगो में महिला खिलाड़ियों की सफलता देश में महिलाओं के सशक्तिकरण की बदलती तस्वीर को भी दर्शाती है। बेहतर प्रशिक्षण, खेल सुविधाओं, सरकारी योजनाओं और बढ़ते सम्मान का सकारात्मक असर अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई दे रहा है। अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के बेहतर तालमेल ने भी भारतीय अभियान को नई ऊंचाई दी।

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 ने यह साबित कर दिया कि इस बार भारत की सफलता की सबसे मजबूत पहचान उसकी ‘नारी शक्ति’ रही, जिसने न सिर्फ पदक जीते बल्कि देशभर की बेटियों के लिए नई प्रेरणा भी बन गई।

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