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Friday, July 31, 2026

प्रियंका गांधी को वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का खुला पत्र, संसद में गरिमापूर्ण बहस की अपील

नई दिल्ली। देश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को खुला पत्र लिखकर संसद और सार्वजनिक जीवन में संवाद की गरिमा बनाए रखने की अपील की है। पत्र में वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के प्रति सम्मानजनक भाषा तथा तथ्यों पर आधारित बहस की जरूरत पर जोर दिया गया है।

वैज्ञानिकों पर व्यक्तिगत टिप्पणी से बचने की अपील

खुले पत्र में कहा गया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि असहमति और आलोचना किस भाषा और तर्क के साथ रखी जाती है। वैज्ञानिकों ने आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर चिंता जताई।

पत्र में कहा गया कि किसी वैज्ञानिक या शिक्षाविद के विचारों से असहमति होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन केवल पद, उपाधि या व्यक्तिगत पहचान के आधार पर किसी को खारिज करना उचित नहीं है। वैज्ञानिक विचारों का मूल्यांकन शोध, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिम्मेदार संवाद पर जोर

हस्ताक्षरकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 51(क)(ह) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और सुधार की भावना को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक प्रतिनिधियों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे वैज्ञानिक विषयों पर जिम्मेदारी और संतुलित तरीके से अपनी बात रखें।

पत्र में कहा गया कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना व्यक्तिगत हमले या उपहास के अपने विचार रख सकें। किसी वैज्ञानिक मत से असहमति होने पर उसका जवाब शोध, प्रमाण और तार्किक बहस के जरिए दिया जाना चाहिए।

वैज्ञानिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत

वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे विषयों को राजनीतिक उपहास का मुद्दा बनाने से समाज में सार्थक बहस का अवसर कम होता है। इन विषयों पर विशेषज्ञों की राय और गंभीर चर्चा लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया के लिए जरूरी है।

पत्र में कहा गया कि लोकतंत्र में आलोचना और असहमति का पूरा अधिकार है, लेकिन इसे व्यक्तिगत टिप्पणी या उपहास का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने सार्वजनिक प्रतिनिधियों से जिम्मेदार भाषा, गरिमापूर्ण आचरण और तथ्य आधारित संवाद अपनाने की अपील की।

यह खुला पत्र प्रो. जीडी यादव, प्रो. पंकज मित्तल समेत कई वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के समन्वय से जारी किया गया।

गौरतलब है कि मंगलवार को लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को लेकर कथित टिप्पणी की थी। इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और शिक्षाविदों के बीच विवाद शुरू हो गया।

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