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Wednesday, July 15, 2026

बायोमेडिकल अनुसंधान को मिलेगा बड़ा बल, 1500 करोड़ रुपये के कार्यक्रम की शुरुआत

नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम के तीसरे चरण की शुरुआत की। इस कार्यक्रम पर कुल 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 1,000 करोड़ रुपये भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग और 500 करोड़ रुपये ब्रिटेन की वेलकम ट्रस्ट संस्था उपलब्ध कराएगी।

नई दिल्ली के एरोसिटी में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारत में विश्वस्तरीय बायोमेडिकल अनुसंधान को बढ़ावा देना और वैज्ञानिकों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इसके तहत शोधकर्ताओं को फेलोशिप, अनुसंधान अनुदान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के अवसर दिए जाएंगे, जिससे देश में मजबूत वैज्ञानिक कार्यबल तैयार हो सके।

2030 तक 300 अरब डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी वर्ष 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195 अरब डॉलर से अधिक हो गई है। वर्ष 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि देश में इस समय लगभग 12 हजार जैव प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार उद्यम कार्यरत हैं और भारत दुनिया के प्रमुख टीका निर्माताओं में शामिल है। उनका कहना था कि आने वाले समय में जैव प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति की सबसे बड़ी ताकत बनेगी और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

अनुसंधान और नवाचार को मिलेगी नई गति

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत साझेदारी से अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा मिलेगी।

वर्ष 2008 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत अब तक 500 से अधिक वैज्ञानिकों को सहायता मिल चुकी है। इससे 200 से ज्यादा शोध संस्थान मजबूत हुए हैं और हजारों युवा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण मिला है।

सरकार का मानना है कि तीसरे चरण के माध्यम से नई चिकित्सा तकनीकों, बेहतर जांच सुविधाओं, सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत की वैश्विक वैज्ञानिक पहचान और मजबूत होगी।

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