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Wednesday, July 15, 2026

आईआईटी जोधपुर ने विकसित किए सूर्य की रोशनी से ऊर्जा संजोने वाले स्मार्ट पदार्थ

जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के वैज्ञानिक सूर्य की दृश्य रोशनी से ऊर्जा संजोने वाले स्मार्ट पदार्थ विकसित करने पर काम कर रहे हैं। यह शोध भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट उपकरणों और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग खोल सकता है।

संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. मोनिका गुप्ता के नेतृत्व में फंक्शनल ऑर्गेनिक मैटेरियल्स प्रयोगशाला की टीम ऐसे विशेष कार्बनिक पदार्थ तैयार कर रही है, जो सूर्य के दृश्य प्रकाश के संपर्क में आते ही अपने गुण बदलकर ऊर्जा का प्रभावी भंडारण और उपयोग कर सकें।

दृश्य प्रकाश से काम करेगी नई तकनीक

वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में अधिकांश स्मार्ट पदार्थ केवल पराबैंगनी किरणों पर सक्रिय होते हैं, जबकि सूर्य के प्रकाश का सबसे बड़ा हिस्सा दृश्य प्रकाश होता है। इसी वजह से उनकी उपयोगिता सीमित रहती है। आईआईटी जोधपुर का शोध ऐसे पदार्थ विकसित करने पर केंद्रित है, जो सीधे दृश्य प्रकाश में सक्रिय होकर अधिक दक्षता और व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित करें।

शोध की प्रमुख उपलब्धियों में दृश्य प्रकाश से संचालित आणविक प्रकाश स्विच का विकास शामिल है। ये सूक्ष्म अणु प्रकाश मिलने पर अपनी संरचना बदल लेते हैं। अब तक ऐसे अणु केवल पराबैंगनी प्रकाश में सक्रिय होते थे, लेकिन नए शोध के जरिए इन्हें सामान्य सूर्य के प्रकाश में भी प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

स्मार्ट खिड़कियों से ऊर्जा भंडारण तक होगा उपयोग

शोधकर्ता इन अणुओं को द्रव क्रिस्टल आधारित पदार्थों के साथ जोड़कर ऐसे स्मार्ट पदार्थ विकसित कर रहे हैं, जो सूर्य की रोशनी पड़ने पर अपने प्रकाशीय और यांत्रिक गुण बदल सकें।

भविष्य में इनका उपयोग स्मार्ट खिड़कियों, स्वयं परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाले प्रकाशीय उपकरणों, प्रकाश संचालित मशीनों, स्मार्ट परतों, उन्नत प्रकाशीय प्रणालियों और नई पीढ़ी के ऊर्जा उपकरणों में किया जा सकेगा।

शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आणविक सौर तापीय ईंधन तकनीक भी है। इसके माध्यम से सूर्य की ऊर्जा को रासायनिक रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे ऊष्मा के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। यह तकनीक अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

डॉ. मोनिका गुप्ता ने कहा कि प्रकृति प्रतिदिन प्रचुर मात्रा में सूर्य का प्रकाश उपलब्ध कराती है, लेकिन मौजूदा तकनीकें उसका पूरा लाभ नहीं उठा पातीं। उनका लक्ष्य ऐसे स्मार्ट पदार्थ विकसित करना है, जो सीधे दृश्य प्रकाश में काम कर वास्तविक परिस्थितियों में सौर ऊर्जा का प्रभावी भंडारण और उपयोग संभव बना सकें।

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