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Saturday, July 11, 2026

वंदे मातरम् ने देशभक्ति को राष्ट्रीय कर्तव्य बनाया : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्र चेतना का प्रतीक है। इसने मातृभूमि के प्रति प्रेम को राष्ट्रीय कर्तव्य का स्वरूप दिया और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असंख्य सेनानियों को साहस, त्याग और प्रेरणा प्रदान की।

वह शुक्रवार को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला द्वारा आयोजित ‘वंदे मातरम् की यात्रा’ विषयक स्थायी प्रदर्शनी के उद्घाटन तथा ‘सरदार पटेल का विजन : एकीकरण, एकजुटता और संघवाद’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को आभासी माध्यम से संबोधित कर रहे थे।

सरदार पटेल ने मजबूत भारत की रखी नींव

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने केवल देशी रियासतों का विलय ही नहीं किया, बल्कि देशवासियों के दिलों को भी जोड़ा। उन्होंने एक राष्ट्र, एक संविधान और साझा राष्ट्रीय भविष्य की मजबूत नींव रखी। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने आधुनिक भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक एकीकरण को साकार किया तथा देश को एक मजबूत और संगठित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि आज भी वंदे मातरम् राष्ट्र के प्रति समर्पण, आत्मगौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रेरक स्रोत बना हुआ है।

देशभक्ति आचरण में दिखनी चाहिए

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि सच्ची देशभक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ईमानदारी, उत्कृष्ट कार्य संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण के रूप में हमारे दैनिक जीवन में दिखाई देनी चाहिए।

उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे वंदे मातरम् के शाश्वत संदेश और सरदार पटेल के राष्ट्रनिर्माण के आदर्शों को अपनाकर एक एकजुट, आत्मविश्वासी और समावेशी भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर ‘वंदे मातरम् की यात्रा’ विषयक स्थायी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। साथ ही सरदार पटेल की राष्ट्र एकता, एकीकरण और भारतीय संघीय व्यवस्था संबंधी दृष्टि पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भी शुभारंभ हुआ।

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