काठमांडू। नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अपने संशोधित पार्टी विधान में एक बेहद अहम और कड़ा प्रावधान जोड़ा है। नए नियमों के मुताबिक, यदि संसदीय दल का नेता यानी प्रधानमंत्री पार्टी अध्यक्ष के नीतिगत निर्देशों और सिद्धांतों का पालन नहीं करता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जा सकेगा। इस कदम को सीधे तौर पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह पर शिकंजा कसने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
विधान की धारा 68 (1) में बड़ा बदलाव, अध्यक्ष को मिले असीमित अधिकार
संशोधित विधान में पार्टी अध्यक्ष के काम, कर्तव्य और अधिकारों का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। इसके तहत ‘संसदीय दल के साथ समन्वय’ को वैचारिक और राजनीतिक नेतृत्व का अनिवार्य हिस्सा घोषित किया गया है:
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अनिवार्य मार्गदर्शन: यदि पार्टी अध्यक्ष स्वयं संसदीय दल का नेता (या प्रधानमंत्री) नहीं है, तो भी उसे संसद में पार्टी की आधिकारिक नीतियों, सिद्धांतों और दृष्टिकोण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संसदीय दल को आवश्यक नीतिगत निर्देश देने का पूरा अधिकार होगा।
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बात न मानने पर पदमुक्ति: विधान में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि अध्यक्ष के इन निर्देशों का पालन करना प्रधानमंत्री और सभी सांसदों का अनिवार्य दायित्व होगा। यदि निर्देशों की अवहेलना की जाती है, तो धारा 68 (1) के तहत संसदीय दल के नेता को पदमुक्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
रवि लामिछाने का बढ़ेगा दबदबा, सांसदों के लिए भी कड़े नियम
इस नए नियम के आने के बाद आरएसपी के वर्तमान पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने का कद और दबदबा संगठन से लेकर सरकार तक काफी बढ़ गया है। अब रवि लामिछाने द्वारा जारी किए गए हर नीतिगत निर्देश को मानना सभी आरएसपी सांसदों और शीर्ष नेतृत्व के लिए बाध्यकारी होगा। यदि कोई भी सांसद या नेता इन नियमों की अनदेखी या बगावत करने की कोशिश करेगा, तो अध्यक्ष को उनके खिलाफ सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार प्राप्त होगा।
