तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। तेहरान में आयोजित विदाई समारोह के दौरान उनके ताबूत पर इमाम रजा दरगाह का विशेष लाल झंडा रखा गया, जिसने व्यापक ध्यान आकर्षित किया। इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नए प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी भी पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए।
लाल झंडे का धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व
रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान स्थित हुसैनी इमाम खुमैनी परिसर पहुंचाया गया, जहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। अंतिम संस्कार जुलूस 4 जुलाई से शुरू होने की तैयारी है।
खामेनेई के ताबूत पर रखा गया लाल झंडा शिया परंपरा में विशेष महत्व रखता है। मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार यह झंडा हुसैन इब्न अली की शहादत का प्रतीक माना जाता है। कर्बला की लड़ाई में उनके बलिदान को शिया समुदाय त्याग, न्याय और संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस प्रतीक के माध्यम से खामेनेई की मृत्यु को शहादत के रूप में प्रस्तुत करने का संदेश दे रहा है।
पहली बार सार्वजनिक मंच पर आए अहमद वाहिदी
आईआरजीसी के नए प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी भी श्रद्धांजलि समारोह में शामिल हुए। अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम माना जा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रमुख मोहम्मद पाकपौर का स्थान लिया है।
वाहिदी लंबे समय से आईआरजीसी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स का नेतृत्व किया था। बाद में यह जिम्मेदारी कासिम सुलेमानी को सौंपी गई, जिनकी 2020 में अमेरिकी हवाई हमले में मौत हो गई थी। वाहिदी पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद सरकार में रक्षामंत्री और दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के कार्यकाल में गृहमंत्री भी रह चुके हैं। दिसंबर 2025 में उन्हें आईआरजीसी का उप प्रमुख नियुक्त किया गया था।
