नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कारोबार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘सुधार सूचना तंत्र’ की शुरुआत की है। जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम के तहत लागू इस व्यवस्था का उद्देश्य पहली बार होने वाली प्रक्रियात्मक त्रुटियों पर कारोबारियों को दंड देने के बजाय उन्हें सुधार का अवसर प्रदान करना है।
पहली गलती पर मिलेगा सुधार का मौका
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई कारोबारी पहली बार किसी निर्धारित प्रक्रिया या नियम के पालन में चूक करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने से पहले उस कमी को दूर करने का अवसर दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे स्वैच्छिक रूप से नियमों के पालन को बढ़ावा मिलेगा, अनावश्यक कानूनी विवाद कम होंगे और भरोसे पर आधारित नियामक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहेगी।
किन मामलों में लागू होगा नया तंत्र
सुधार सूचना तंत्र पहली बार होने वाली कुछ निर्धारित प्रक्रियात्मक और नियामकीय कमियों पर लागू होगा। इनमें पंजीकरण संबंधी आवश्यकताएं, दस्तावेजों का रखरखाव, अभिलेख संधारण, मॉडल अनुमोदन, बाट एवं माप का निर्माण, बिक्री और मरम्मत, बाट एवं माप का आयात, लेन-देन, पैक्ड वस्तुओं से जुड़े नियम, कानूनी घोषणाएं और रिटर्न दाखिल करना जैसे प्रावधान शामिल हैं।
उपभोक्ता संरक्षण पर नहीं पड़ेगा असर
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस नई व्यवस्था से उपभोक्ता संरक्षण या कानूनी मापन अधिनियम के तहत प्रवर्तन व्यवस्था कमजोर नहीं होगी। यह तंत्र केवल पहली बार होने वाली निर्धारित प्रक्रियात्मक और नियामकीय गैर-अनुपालनों तक सीमित रहेगा और गंभीर उल्लंघनों पर मौजूदा कानूनी कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी।
सरकार का मानना है कि यह पहल कारोबार के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ-साथ नियामकीय अनुपालन को सरल और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
