नई दिल्ली। मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने और वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) हासिल करने की दिशा में केंद्र सरकार सोमवार को ‘सुमन रोडमैप 2030’ जारी करेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन में इस रणनीतिक दस्तावेज का विमोचन करेंगे। यह रोडमैप मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित और बहुआयामी रणनीति प्रस्तुत करता है।
राज्यों की जरूरत के अनुसार बनेगी कार्ययोजना
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत ने पिछले एक दशक में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन कई राज्यों और जिलों में अब भी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए रोडमैप में सभी राज्यों के लिए एक समान नीति के बजाय स्थानीय आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की गई है।
इसमें गर्भधारण से पहले की देखभाल, गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल को एकीकृत किया गया है। साथ ही इसे प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण कार्यक्रमों से जोड़ा गया है।
13 राज्यों के 130 जिलों पर रहेगा विशेष फोकस
रोडमैप के तहत असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के 130 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में विशेष रणनीति लागू की जाएगी।
इन जिलों में गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, सभी आवश्यक प्रसवपूर्व जांच, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय परीक्षण और प्रसव के बाद पर्याप्त संस्थागत देखभाल सुनिश्चित करने के लिए ‘सुमन पैकेज फॉर प्रेग्नेंट वुमेन’ लागू किया जाएगा।
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर विशेष निगरानी
रोडमैप में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और प्रबंधन के लिए चार-स्तरीय प्रणाली विकसित की गई है। इसके तहत गर्भावस्था के शुरुआती चरण, तीसरी तिमाही, प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार निगरानी एवं समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
इसके अलावा आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, आपातकालीन प्रसूति सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, रेफरल परिवहन व्यवस्था मजबूत करने तथा बर्थ वेटिंग होम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट और आईसीयू जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है।
आशा कार्यकर्ता करेंगी घर-घर निगरानी, पंचायतों की होगी भागीदारी
रोडमैप के तहत आशा कार्यकर्ता गर्भावस्था के आठवें और नौवें महीने में प्रत्येक पखवाड़े घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच करेंगी। साथ ही पोषण संबंधी परामर्श, खतरे के लक्षणों की पहचान, सुरक्षित प्रसव की तैयारी और संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए ‘सुमन पंचायत’ की अवधारणा लागू की जाएगी, जिसका लक्ष्य शून्य मातृ मृत्यु, शून्य शिशु मृत्यु, समय पर गर्भावस्था जांच, संस्थागत प्रसव और शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करना है। इसके अलावा ‘मदर्स पिकनिक’ जैसी पहल के माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि ‘सुमन रोडमैप 2030’ बेहतर स्वास्थ्य अवसंरचना, लक्षित हस्तक्षेप, मजबूत सामुदायिक भागीदारी और समयबद्ध कार्ययोजना के माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगा तथा वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
