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Friday, June 19, 2026

झारखंड: सुरक्षा बलों के दबाव में दलमा क्षेत्र में सक्रिय हुआ इनामी नक्सली सचिन; मुख्यधारा में लौटने की अपील

पूर्वी सिंहभूम, 19 जून। पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर और आक्रामक नक्सल विरोधी अभियान के कारण संगठन बैकफुट पर है। इस बीच, खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला है कि इनामी नक्सली रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन अब पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम और दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य (Dalma) के इलाकों में सक्रिय हो गया है। इस सूचना के बाद पूरा सुरक्षा तंत्र सतर्क हो गया है और जिला पुलिस को विशेष निगरानी बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।

नक्सली हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटें: रामकृष्ण महतो

शुक्रवार को दलमा आंचलिक सुरक्षा समिति के केंद्रीय महासचिव और बोड़ाम निवासी रामकृष्ण महतो ने क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों से हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में लौटने की भावुक अपील की है।

“झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति उन लोगों के लिए एक बेहतरीन अवसर है, जो सालों से नक्सली गतिविधियों के कारण सामान्य और गरिमापूर्ण जीवन से दूर हो चुके हैं। आत्मसमर्पण कर नक्सली अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित और नए जीवन की शुरुआत कर सकते हैं।” — रामकृष्ण महतो, केंद्रीय महासचिव (दलमा आंचलिक सुरक्षा समिति)

महिला नक्सली ‘वर्षा’ के आत्मसमर्पण का स्वागत

रामकृष्ण महतो ने हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली शकुंतला महतो उर्फ वर्षा उर्फ पुष्पा के फैसले की सराहना की। उन्होंने वर्षा के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया:

  • बचपन में भटकाव: वर्षा एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। वह महज 11 साल की उम्र में अपने चाचा अर्जुन महतो के प्रभाव में आकर नक्सली संगठन में शामिल हो गई थी।

  • 25 साल जंगल में गुजारे: वर्षा ने अपने जीवन के करीब 25 साल जंगलों और नक्सली दस्तों के बीच बिताए, जिससे उसका पारिवारिक जीवन पूरी तरह प्रभावित रहा।

  • नक्सलवाद एक दलदल: महतो ने साल 2004 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि दलमा क्षेत्र में मुलाकात के दौरान वर्षा ने खुद कहा था कि— “नक्सलवाद एक ऐसा दलदल है, जिसमें आने के रास्ते तो बहुत हैं, पर बाहर निकलने का रास्ता बेहद मुश्किल होता है।” वह संगठन की नीतियों से संतुष्ट नहीं थी, लेकिन परिस्थितियों के कारण बंधकर रह गई थी।

कुख्यात नक्सलियों के दस्ते में रही शामिल

वर्षा को उसके चाचा अर्जुन महतो ने घर से निकाल कर गिरिडीह के कुख्यात नक्सली अतुल महतो के दस्ते में शामिल करवा दिया था। वर्षा के चाचा अर्जुन महतो पर भी कई संगीन मामले दर्ज थे और करीब एक दशक पहले घाटशिला क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में वह मारा गया था।

इन सक्रिय नक्सलियों से की सरेंडर की अपील

रामकृष्ण महतो ने कहा कि वर्षा का आत्मसमर्पण जंगलों में भटक रहे अन्य नक्सलियों की आंखें खोलने के लिए एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने मुख्य रूप से दलमा और आस-पास के क्षेत्रों में सक्रिय निम्नलिखित नक्सलियों से हथियार डालने की अपील की है:

  1. रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन (इनामी नक्सली)

  2. मीता

  3. सागर

  4. रवि

उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। समाज और परिवार के बीच लौटकर ही एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

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