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Friday, June 19, 2026

झारखंड: गंडा समाज को एससी का दर्जा देने की मांग तेज; राज्यपाल-मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

जमशेदपुर । झारखंड में गंडा समाज को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। शुक्रवार को समाज के सैकड़ों लोगों ने अपनी इस पुरानी मांग को लेकर पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के उपायुक्त (DC) कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा।

पड़ोसी राज्यों में दर्जा, तो झारखंड में उपेक्षा क्यों?

उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में गंडा समाज ने नीतिगत विसंगतियों पर सवाल उठाए हैं:

  • समान सामाजिक स्थिति: समाज का तर्क है कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी और अन्य राज्यों में गंडा जाति को पहले से ही अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा मिला हुआ है।

  • योजनाओं से वंचित: झारखंड में समान सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन के बावजूद इस समुदाय को अब तक एससी की सूची में शामिल नहीं किया गया है। इसके कारण स्थानीय स्तर पर इन्हें जाति प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, आरक्षण और कई महत्वपूर्ण सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।

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‘राज क्लब गंडा समाज’ के अध्यक्ष नरेश कुमार टांडिया ने समुदाय की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

मांग पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि गंडा समाज लंबे समय से सामाजिक न्याय की लड़ाई शांतिपूर्ण ढंग से लड़ रहा है। यदि सरकार ने इस बार उनकी मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक पहल नहीं की, तो समाज के लोग अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से एक व्यापक और राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।

प्रदर्शन में ये रहे मुख्य रूप से शामिल

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से राज क्लब गंडा समाज के अध्यक्ष नरेश कुमार टांडिया सहित फूलचंद राय, धर्मेंद्र दीप, हिरण बीथ, कृपा नाग, मोतीलाल करन, सुमित्रा सागर, शंकर टांडिया, रेखा महानंद, सागर सोना, सोनू सोना, मनोज नाग, बलराम टांडी, कार्तिक दीप, अरुण दीप, लक्ष्मी महानंद, गोरेश नाग, रेखो हर्षपाल, प्रिया नाग, अंजलि छत्तर, मदन कुमार, नवीन कुमार, हेमंत विश्वाल, सन्नी टांडी, दिलीप कुमार सुना, श्याम बारिक, आनंद नाग और गणेश नाग समेत भारी संख्या में समाज के महिला व पुरुष सदस्य मौजूद थे।

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