क्वेटा (बलोचिस्तान), 19 जून। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा (बॉर्डर) बंद होने के कारण द्विपक्षीय व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। इस गतिरोध की वजह से दोनों देशों के व्यापारियों और उद्योगपतियों को पिछले आठ महीनों में अरबों रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।
आठ महीने में 418 अरब रुपये का कुल नुकसान
‘बलोचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाक-अफगान ज्वाइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PAJCCI) ने गुरुवार को दोनों देशों को हुए नुकसान के आंकड़े जारी किए हैं:
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पाकिस्तानी व्यापारियों को नुकसान: पिछले आठ महीनों में ट्रेड रूट और बॉर्डर बंद रहने से पाकिस्तानी कारोबारियों को 278 अरब रुपये से अधिक का घाटा हुआ है।
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अफगानी व्यापारियों को नुकसान: इसी अवधि के दौरान अफगानिस्तान के उद्योगपतियों को भी लगभग 140 अरब पाकिस्तानी रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
टॉप-10 एक्सपोर्ट देशों की सूची से बाहर हुआ अफगानिस्तान
हाल ही में जारी हुए ‘पाकिस्तान इकोनॉमिक सर्वे’ के मुताबिक, बॉर्डर सिक्योरिटी मैनेजमेंट (सीमा सुरक्षा प्रबंधन) के विवादों के कारण दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में भारी गिरावट आई है।
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एक्सपोर्ट में गिरावट: वर्ष 2025 में अफगानिस्तान को होने वाला पाकिस्तान का सालाना एक्सपोर्ट 4.5 प्रतिशत से घटकर महज 1.5 प्रतिशत रह गया है।
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रैंकिंग में नुकसान: अफगानिस्तान पहले उन टॉप-10 देशों में शुमार था, जहां पाकिस्तान सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता था, लेकिन अब वह इस सूची से बाहर हो चुका है।
अक्टूबर 2025 से बंद हैं तोरखम और चमन बॉर्डर
दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव के कारण पिछले साल 13 अक्टूबर (2025) से तोरखम और चमन समेत सभी प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स को पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
मेडिकल टूरिज्म और इकोनॉमी पर चौतरफा मार
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सालाना ट्रेड वॉल्यूम (व्यापार का कुल आकार) लगभग 1 बिलियन डॉलर (एक अरब डॉलर) का है। इस नाकाबंदी से न केवल आर्थिक और व्यावसायिक मोर्चे पर नुकसान हो रहा है, बल्कि ‘मेडिकल टूरिज्म’ (स्वास्थ्य पर्यटन) भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इलाज के लिए अफगानिस्तान से पाकिस्तान आने वाले मरीजों और उनके परिवारों को बॉर्डर बंद होने के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
